विद्युत विभाग :CM सिटी के पड़ोसी जिले महराजगंज में बिजली विभाग का बड़ा ‘खेल’: नियमों को ताक पर रखकर चहेती फर्मों को टेक्निकल बिड में किया पास, मुख्य अभियंता ने दिए जांच के आदेश

गोरखपुर/महराजगंज 15सितंबर :एक तरफ जहां पूरे प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में भीषण बिजली कटौती को लेकर जनता त्रस्त है और सरकार की साख दांव पर लगी है, वहीं दूसरी तरफ पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम के अधिकारी सरकारी नियमों की धज्जियां उड़ाने में मस्त हैं। ताजा मामला सीएम सिटी गोरखपुर से सटे पड़ोसी जनपद महराजगंज का है, जहां विद्युत वितरण मंडल द्वारा जारी टेंडर में भारी अनियमितता और साठगांठ का मामला सामने आया है।
अपात्र फर्मों को फायदा पहुंचाने के लिए नियमों को किनारे कर उन्हें टेक्निकल बिड में पास कर दिया गया, जिसके बाद मामले ने तूल पकड़ लिया है।
क्या है पूरा मामला?
विद्युत वितरण मंडल, महराजगंज द्वारा आमंत्रित टेंडर संख्या 32/E.D.C.(M)/MRJ/2026–27 में गंभीर धांधली के आरोप लगे हैं। शिकायतकर्ता फर्म M/S Tripathi ब्रदर्स ने मुख्य अभियंता (वितरण), गोरखपुर क्षेत्र द्वितीय को पत्र सौंपकर टेंडर प्रक्रिया में बड़े भ्रष्टाचार का खुलासा किया है।
शिकायत के अनुसार, दो प्रमुख फर्मों—मेसर्स श्याम इंटरप्राइजेज और मेसर्स श्री साई कंस्ट्रक्शन—में तकनीकी स्तर पर कई बड़ी कमियां होने के बावजूद विभागीय सांठगांठ के चलते उन्हें टेक्निकल बिड में क्वालीफाई करा दिया गया:
मेसर्स श्याम इंटरप्राइजेज (धरमौली, परतावल): टर्नओवर टेंडर की शर्तों से काफी कम है और उस पर U.D.I.N. नंबर तक दर्ज नहीं है।
वर्ष 2023, 2024 और 2025 की बैलेंस शीट में U.D.I.N. नदारद है।
बैंक द्वारा जारी Solvency Certificate संलग्न नहीं किया गया है।
अनुभव प्रमाण पत्र में कार्यपूर्ति की कोई तिथि अंकित नहीं है।
Earnest Money एवं Tender Fees की रसीद पर टेंडर नंबर दर्ज नहीं है।
मेसर्स श्री साई कंस्ट्रक्शन (मनसरबगड़, बृजमनगंज): Earnest Money और Tender Fees SBI बृजमनगंज शाखा से भेजी गई है, जबकि GST घोषणा-पत्र में ‘श्री साई कान्स्ट्रक्शन एवं फर्म’ लिखा है।
टेंडर में जमा Earnest Money ‘श्री कान्स्ट्रक्शन’ के नाम से जमा की गई है, जो सीधे नियमों का उल्लंघन है।
विद्युत सुरक्षा निदेशालय द्वारा जारी Class ‘A’ Certificate की छायाप्रति संलग्न नहीं है।
Net Worth Certificate और Turn Over Certificate पर U.D.I.N. गायब है।
Earnest Money और Tender Fees पर टेंडर नंबर अंकित नहीं है।
मुख्य अभियंता ने दिए जांच के आदेश
मामला संज्ञान में आते ही हड़कंप मच गया है। बिजली विभाग में जारी इस ‘खेल’ और सरकारी नियमों के मज़ाक पर मुख्य अभियंता वितरण, गोरखपुर क्षेत्र द्वितीय ने कड़ा रुख अपनाया है।
विभाग के उच्च अधिकारियों का कहना है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर दोषी पाई जाने वाली फर्मों को टेंडर प्रक्रिया से बाहर कर वैधानिक कार्रवाई की जाएगी और पारदर्शी व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी।
शिकायतकर्ता फर्म ने मामले की प्रतिलिपि प्रबंध निदेशक (PVVNL, वाराणसी), निदेशक तकनीकी
और अधीक्षण अभियंता (विद्युत वितरण मंडल, महराजगंज)को भेजकर वित्तीय बिड (Financial Bid / Part 2) खोलने से पहले अपात्र कंपनियों को बाहर करने की मांग की है।
तकनीकी विंग की भूमिका पर भी गहराया संदेह
इस पूरे घटनाक्रम के बाद अब उंगलियां सीधे पूर्वांचल की टेक्निकल विंग पर उठना भी लाजिमी है। आखिर किस दबाव या साठगांठ के तहत बिना UDIN, बिना वैलिड Solvency Certificate और बिना आवश्यक क्लास ‘A’ लाइसेंस वाली फर्मों के दस्तावेजों को टेक्निकल बिड के दौरान हरी झंडी दे दी गई?
गौरतलब है कि यह कोई अकेला मामला नहीं है; बस्ती से लेकर महराजगंज और मिर्जापुर तक पूर्वांचल के विभिन्न मंडलों में टेंडर आवंटन और तकनीकी मूल्यांकन को लेकर बड़े पैमाने पर गड़बड़ी के गंभीर आरोप लगातार लग रहे हैं। ऐसे में अगर Discom प्रशासन ने अपनी ही टेक्निकल विंग के मूल्यांकन कर्ताओं और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की गहराई से जांच नहीं की, तो महज जांच कमिटी का गठन एक कागजी खानापूर्ति बनकर रह जाएगा।






