गोरखपुर विसर्जन कांड: 10 दिन बाद भी जांच अधर में, ‘साहब’ को बचाने का खेल चालू? JE के पक्ष में मिले सबूत, SDO गाजी खान पर कसता शिकंजा!

गोरखपुर 01नवंबर :गुलरिहा क्षेत्र के रजही चौराहे पर दुर्गा प्रतिमा विसर्जन के दौरान 11,000 वोल्ट की हाईटेंशन लाइन से हुए दर्दनाक हादसे (3 मौतों) को पूरे 10 दिन बीत चुके हैं। लेकिन 3 दिन के भीतर जांच रिपोर्ट देने का दावा करने वाला जिला प्रशासन और बिजली महकमा अब तक जांच पूरी नहीं कर पाया है।
जैसे-जैसे दिन बीत रहे हैं, बिजली महकमे के अंदरखाने से आ रही खबरें इस पूरे मामले में एक बड़े ‘सिस्टम के खेल’ की तरफ इशारा कर रही हैं।
10 दिन बाद भी जांच रिपोर्ट क्यों है लापता?
हादसे के बाद डीएम गोरखपुर द्वारा अपर जिलाधिकारी (नगर), अपर पुलिस अधीक्षक (नगर) और अधीक्षण अभियंता की तीन सदस्यीय हाई-लेवल कमेटी का गठन कर 3 दिन में रिपोर्ट मांगी गई थी। लेकिन 10 दिन बीत जाने के बावजूद यह जांच ठंडे बस्ते में है।
क्या विभागीय जांच को जानबूझकर लटकाया जा रहा है ताकि मामला मीडिया और जनता के संज्ञान से हल्का पड़ जाए?
क्या किसी बड़े और रसूखदार अधिकारी को बचाने के लिए यह ढिलाई बरती जा रही है?
JE निकेतन गुप्ता की मुस्तैदी के मिले सबूत, क्या बेवजह दी गई सजा?
शुरुआती कार्रवाई में गाज JE निकेतन गुप्ता पर गिराकर उन्हें आनन-फानन में सस्पेंड कर दिया गया था। लेकिन अब जो नए तथ्य और साक्ष्य सामने आ रहे हैं, वे चौंकाने वाले हैं:
दूसरी साइट पर मुस्तैद थे JE:
घटना के वक्त JE निकेतन गुप्ता किसी लापरवाही में नहीं, बल्कि विभागीय ड्यूटी के तहत अपनी पूरी मुस्तैदी के साथ दूसरी विसर्जन साइट पर व्यवस्था संभाल रहे थे। इसके पुख्ता साक्ष्य जांच के दायरे में सामने आए हैं।
बलि का बकरा बनाए गए जूनियर अफसर?
जब जेई अपनी ड्यूटी पर तैनात थे, तो सवाल यह उठता है कि क्या केवल जनता के गुस्से को शांत करने और ‘फेस सेविंग’ के लिए छोटे कर्मचारी को बलि का बकरा बनाया गया?
SDO गाजी खान पर उठते तीखे सवाल: आखिर किसका संरक्षण है हासिल?
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, इस पूरी घटना के दौरान सबसे बड़ी गैर-जिम्मेदारी उपखंड अधिकारी गाजी खान के स्तर पर देखी गई है:
घटना के दिन फील्ड से नदारद?
हादसे वाले दिन जब संवेदनशील विसर्जन प्रक्रिया चल रही थी, तब SDO गाजी खान फील्ड में मौजूद ही नहीं थे।
कौन रच रहा है बचाने की पटकथा?
विभागीय चर्चाओं के मुताबिक, हादसे के बाद से ही SDO साहब अपनी गर्दन बचाने और उच्च स्तर पर लॉबिंग करने में जुटे हुए हैं। विभागीय साठगांठ का आलम यह है कि इतनी बड़ी मानवीय त्रासदी के बाद भी उन पर कोई सीधी जांच की आंच तक नहीं आने दी जा रही है।
अखिलेश यादव के ट्वीट से सियासी पारा गर्म, जनता मांग रही जवाब
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव द्वारा इस हादसे और विभागीय लापरवाही पर किए गए तीखे ट्वीट के बाद सरकार और स्थानीय प्रशासन बैकफुट पर है। विपक्ष के कड़े हमलों के बावजूद जांच का 10 दिनों तक अटका रहना प्रशासन की मंशा पर गंभीर सवाल उठाता है।
क्या मिलेगा लक्की, विक्की और चंदन के परिवारों को न्याय?
एक ही परिवार के तीन चिराग बुझने के बाद भी अगर असली जिम्मेदार बड़े अफसरों पर कार्रवाई नहीं होती और सिर्फ संविदाकर्मियों व जेई को बलि का बकरा बनाया जाता रहेगा, तो इसे न्याय नहीं बल्कि ‘लीपापोती’ कहा जाएगा।पीड़ित परिजनों और स्थानीय लोगों का कहना है कि जब तक SDO गाजी खान जैसे मुख्य जिम्मेदार और रसूखदार अधिकारियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई नहीं की जाती, तब तक यह दर्द और आक्रोश शांत नहीं होगा। सिर्फ संविदाकर्मियों और जेई को बलि का बकरा बनाकर लीपापोती करने के इस खेल ने जनता के बीच प्रशासन के प्रति अविश्वास को और गहरा कर दिया है।
बड़ा सवाल यही है
क्या गोरखपुर प्रशासन और बिजली निगम मलाईदार SDO गाजी खान पर शिकंजा कसने का साहस दिखा पाएगा, या यह फाइल भी ठंडे बस्ते के हवाले कर दी जाएगी?
युद्ध अभी शेष है






