विद्युत विभाग :फाइलें दफ्तरों में कैद, भ्रष्टाचारियों को ‘अभयदान’: नयापार लाइन शिफ्टिंग घोटाले की जांच ठंडे बस्ते में!

अक्टूबर के पहले हफ्ते में बनी थी 3-सदस्यीय जांच कमेटी, 15 दिन में रिपोर्ट देने का था दावा—लेकिन अब तक नतीजा सिफर; पुरानी फाइलों की तरह इस मामले पर भी लीपापोती की पूरी तैयारी
गोरखपुर 29अक्टूबर : मासूम बच्चों की सुरक्षा के नाम पर स्कूल के ऊपर से गुजर रही हाईटेंशन लाइन की शिफ्टिंग में हुए खेल और ‘आपदा’ की आड़ में करोड़ों के कागजी फर्जीवाड़े को प्रकाश में आए हफ्ते बीत चुके हैं, लेकिन बिजली महकमे के भीतर चल रहा खेल अब अपनी पुरानी रंगत में लौट आया है। अक्टूबर के पहले सप्ताह में मचे हड़कंप के बाद जिस तेजी से 3-सदस्यीय जांच कमेटी का गठन किया गया था, उतनी ही तेजी से अब इस पूरे प्रकरण को ठंडे बस्ते में डालने की तैयारी पूरी कर ली गई है।
महकमे के उच्चाधिकारियों के दावों के विपरीत, निर्धारित 15 दिन की मियाद गुजर जाने के बाद भी जांच रिपोर्ट का दूर-दूर तक कोई पता नहीं है। न तो किसी दोषी पर विभागीय गाज गिरी और न ही कोई कार्रवाई सामने आई, जिससे साफ जाहिर होता है कि जांच के नाम पर केवल जनता और मीडिया की आंखों में धूल झोंकने का पुराना हथकंडा अपनाया गया है।
जांच कमेटी की चुप्पी पर उठ रहे बड़े सवाल
नयापार उपकेंद्र के लाइन शिफ्टिंग घोटाले की जांच का जिम्मा अधिशासी अभियंता परीक्षण देवेंद्र गुप्ता की अध्यक्षता वाली 3-सदस्यीय टीम को सौंपा गया था। महकमे के भीतर सुगबुगाहट तेज है कि आखिर जब घपले के प्रमाण स्पष्ट थे, तो रिपोर्ट सार्वजनिक क्यों नहीं की जा रही?
कार्रवाई के नाम पर चुप्पी: 15 दिनों के भीतर रिपोर्ट सौंपकर कठोर कार्रवाई का दावा करने वाले जिम्मेदार अब इस मामले पर पूरी तरह मौन साध चुके हैं।
जांच टीम की कार्यप्रणाली पर संदेह: रिपोर्ट को लटकाए रखना और दोषियों को बचाने की सुगबुगाहट यह साबित करती है कि महकमा अपने ही भ्रष्ट इंजीनियरों को बचाने के लिए किस हद तक जा सकता है।
पुराना इतिहास: जहां जांच का मतलब ही ‘मामला रफा-दफा’ करना है
गोरखपुर बिजली महकमे में घोटालों को दबाने का पुराना इतिहास रहा है। हालिया प्रकरणों पर गौर करें तो यह साफ हो जाता है कि फाइलों को कैसे और क्यों दबाया जाता है:
सेवई बाजार 13 पोल का अवैध खेल:
सेवई बाजार में 13 पोल की अवैध लाइन खींचने के बहुचर्चित मामले में जांच फाइलों में ही दम तोड़ चुकी है।रतौंधी फैलाने वाली बात यह है कि इस गंभीर मामले में लिप्त JE अवनीश पाण्डेय और संबंधित SDO पर कार्रवाई करने के बजाय उन्हें मलाईदार और सुरक्षित नई तैनातियों से नवाज दिया गया—इसे साफ तौर पर महकमे की तरफ से मिला ‘अभयदान’ ही कहा जाएगा।
सरदारनगर 33KV लाइन चोरी का अता-पता नहीं:
सरदारनगर में 33 हजार वोल्ट की लाखों रुपये की लाइन और तार गायब होने का मामला महीनों से फाइलों में धूल फांक रहा है। विभाग आज तक यह तय नहीं कर पाया कि यह लाइन किस योजना में बनी और कब हैंडओवर हुई । चोरी के इस खेल में किसी पर शिकंजा कसने की हिम्मत कोई अधिकारी नहीं जुटा पा रहा है।
जनता की नजरें मुख्य अभियंता पर: क्या इस बार भी चलेगी लीपापोती की कैंची?
एक तरफ जहां महकमे के अधिकारी फाइलों को मैनेज करने में जुटे हैं, वहीं दूसरी तरफ आम जनता और जागरूक हलकों में भारी आक्रोश है। सवाल अब सीधा पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड और क्षेत्र के मुख्य अभियंता की कार्यशैली पर है:
क्या मुख्य अभियंता इस मामले में खुद संज्ञान लेकर लंबित जांच रिपोर्ट को सार्वजनिक करेंगे?
क्या सेवई बाजार और नयापार के दोषियों को बचाने वाले संरक्षकों पर कोई गाज गिरेगी, या फिर यह नया घोटाला भी पुरानी फाइलों की तरह कागजों में दफन हो जाएगा?
अब सवाल यह उठता है कि क्या महकमे के तेज-तर्रार मुख्य अभियंता की पैनी नजरें इन रसूखदार और भ्रष्ट अधिकारियों के खेल को भेद पाएंगी, या फिर जांच के नाम पर होने वाली यह खानापूर्ति फाइलों के दबी-दराजों में ही दम तोड़ देगी?
पूरा जनपद अब मुख्य अभियंता के अगले और निर्णायक कदम का इंतजार कर रहा है।
भ्र्ष्टाचार और भ्र्ष्टाचारियो के विरुद्ध युद्ध अभी शेष है।






