सिद्धार्थनगर ₹27 करोड़ ‘Force PD’ महाघोटाला: जांच ठंडे बस्ते में, बांसी खंड के चार्ज पर नया खेल और अफसरों की मिलीभगत से हड़कंप!

सिद्धार्थनगर 28अक्टूबर :पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड के अंतर्गत सिद्धार्थनगर और बांसी में सामने आए ₹27 करोड़ के ‘Force PD’ एवं फर्जी बिल रिवीजन महाघोटाले में एक नया और बेहद चौकाने वाला मोड़ सामने आया है।
उच्चाधिकारियों के कड़े रुख और स्पष्ट निर्देशों के बावजूद धरातल पर कार्रवाई अब भी पूरी तरह शून्य है, और घोटाले पर पर्दा डालने का विभागीय खेल बदस्तूर जारी है।
हाल ही में सामने आए आधिकारिक दस्तावेज और कार्यालय-ज्ञाप (पत्रांक: 5314, दिनांक: 05.10.2026) यह साबित कर रहे हैं कि किस तरह प्रशासनिक अधिकारों का दुरुपयोग करके जांच को अटकाने और भटकाने की साजिश रची जा रही है।
अधिशासी अभियंता के छुट्टी पर जाते ही नया खेल: XEN के बजाय SDO को थमाया चार्ज!
चौंकाने वाली चाल: बांसी खंड के अधिशासी अभियंता (XEN) राजीव कुमार शर्मा के अचानक चिकित्सीय अवकाश (05.10.2026 से 09.10.2026) पर जाने के बाद, किसी अन्य नियमित अधिशासी अभियंता को चार्ज न देकर नियम-कायदों को किनारे रखकर उपखण्ड अधिकारी राकेश कुमार यादव को बांसी खंड का अतिरिक्त कार्यभार सौंप दिया गया है।
फाइलों की लीपापोती की साजिश: विभागीय सूत्रों के अनुसार, यह कदम इसलिए उठाया गया है क्योंकि यदि किसी दूसरे खंड के अधिशासी अभियंता को चार्ज दिया जाता, तो वह बांसी खंड में हुए करोड़ों के फर्जीवाड़े और फाइलों को उधेड़ सकता था।
इस घोटाले की सच्चाई को दबाए रखने के लिए ही एसडीओ स्तर के अधिकारी को चार्ज देने का यह प्रशासनिक खेल खेला गया है।
चेयरमैन UPPCL और MD के आदेश ठंडे बस्ते में, बस्ती ज़ोन के शीर्ष अफसरों का संरक्षण
शीर्ष प्रबंधन की अवहेलना: चेयरमैन UPPCL, MD पूर्वांचल (संदीप कुमार) और निदेशक (वाणिज्य) के सख्त निर्देशों के बावजूद सिद्धार्थनगर और बांसी का बिल रिवीजन घोटाला जस का तस अटका हुआ है।
संरक्षण के गंभीर आरोप: मुख्य अभियंता (वितरण) बस्ती क्षेत्र (विजय कुमार गुप्ता) और अधीक्षण अभियंता (SE) लाल सिंह पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि बस्ती ज़ोन के शीर्ष अधिकारियों के सीधे संरक्षण की वजह से दागी कर्मियों पर कार्रवाई करने के बजाय पूरे मामले को कागजी खानापूर्ति में समेटा जा रहा है।
डिजिटल साक्ष्यों को मिटाने की हो रही साजिश
घोटाले के सार्वजनिक होने के बाद दागी कर्मचारियों और बाबुओं से तुरंत बिलिंग पासवर्ड और सर्वर एक्सेस वापस लेकर FIR दर्ज होनी चाहिए थी।
परंतु जमीनी हकीकत यह है कि दागी कर्मचारी आज भी उन्हीं डिजिटल सर्वर, बिलिंग आईडी और पत्रावलियों पर काबिज हैं। वे बेखौफ होकर डिजिटल साक्ष्यों (‘Force PD’ व फर्जी बिल रिवीजन के डेटा) को मैनिपुलेट करने और फाइलों में हेरफेर करने में जुटे हैं।
नए व ईमानदार MD संदीप कुमार की साख दांव पर, ‘ज़ीरो टॉलरेंस’ के दावों की परीक्षा!
पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड की कमान जब से नवागत एवं सख्त छवि वाले प्रबन्ध निदेशक संदीप कुमार के हाथों में आई है, तब से महकमे में भ्रष्टाचार पर ‘ज़ीरो टॉलरेंस’ नीति की उम्मीद जगी थी। लेकिन हैरानी की बात है कि MD के स्पष्ट निर्देशों के बाद भी बस्ती ज़ोन का स्थानीय सिंडिकेट खुलेआम उनके आदेशों को हवा में उड़ा रहा है।
आखिर मुख्य अभियंता बस्ती और अधीक्षण अभियंता लाल सिंह किस शह पर जांच को दबा रहे हैं? क्या ईमानदार एमडी संदीप कुमार खुद कड़ा संज्ञान लेकर इस भ्रष्ट सिंडिकेट को ध्वस्त करेंगे और दोषियों पर विजिलेंस तथा FIR का हंटर चलाएंगे?
‘उपभोक्ता की आवाज’ इस पूरे घटनाक्रम, विभागीय फाइलों और शासन स्तर की हर हलचल पर अपनी पैनी नजर बनाए रखेगा!






