सरकारी आवास पर कब्जा जमाकर चल रहा था ठेकेदारी का खेल, दस्तावेजों में गोलमाल से गहरी साकी की बू!

?गोरखपुर 29अक्टूबर :पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड के अंतर्गत आने वाले गोरखपुर क्षेत्र में इन दिनों एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने विभागीय अधिकारियों के बीच हड़कंप मचा दिया है। पादरी बाजार, गोरखपुर के निवासी शत्रुधन सिंह द्वारा मुख्य अभियंता और अधीक्षण अभियंता को सौंपे गए दो अलग-अलग वायरल पत्रों ने बिजली विभाग के ठेकेदारी तंत्र और प्रशासनिक सुस्ती पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जांच के दायरे में आए दस्तावेजों से यह खुलासा हुआ है कि किस तरह नियमों को ताक पर रखकर सरकारी आवास से अवैध धंधा चलाया जा रहा था और तमाम सर्किल्स में टेंडर हासिल किए जा रहे थे।
,सरकारी आवास पर अवैध कब्जा और ठेकेदारी
शिकायती पत्रों के मुताबिक, मेसर्स वीरेन्द्र किशोर पाण्डेय (प्रोप्राइटर वीरेन्द्र किशोर पाण्डेय, पुत्र स्व. कृष्ण कुमार पाण्डेय) पिछले कई वर्षों से विद्युत विभाग के आवासीय परिसर—डी-59, पावर हाउस कॉलोनी, रामजानकी मंदिर, मोहद्दीपुर, गोरखपुर में रहकर ठेकेदारी का काम कर रहे हैं।
चौंकाने वाली बात यह है कि उनके आधार कार्ड और आयकर रिटर्न जैसे पुख्ता दस्तावेजों में भी इसी सरकारी आवास का पता दर्ज है।
नियमों का खुला उल्लंघन: विद्युत विभाग के नियमों के अनुसार, टेंडर भरते समय ठेकेदार को शपथ-पत्र देना होता है कि उनका कोई भी सगा-संबंधी या रिश्तेदार विभाग में कार्यरत नहीं है या उनका विभाग से कोई प्रत्यक्ष हित जुड़ा नहीं है। लेकिन जब ठेकेदार खुद विभाग के सरकारी आवास में कब्जा जमाए बैठा हो, तो निष्पक्षता और बड़ी साजिश की बू आना लाजिमी है।
दस्तावेजों में हेराफेरी: आधार कार्ड का दूसरा पन्ना क्यों छिपाया गया?
शिकायकर्ता ने आरोप लगाया है कि मेसर्स वीरेन्द्र किशोर पाण्डेय ने टेंडर प्रक्रिया के दौरान अपने आधार कार्ड का मात्र पहला पृष्ठ ही ऑनलाइन अपलोड किया।
दूसरा पृष्ठ जानबूझकर छिपाया गया, क्योंकि उस पर स्पष्ट रूप से सरकारी आवास (डी-59, पावर हाउस कॉलोनी, मोहद्दीपुर) का पता दर्ज था। यदि दूसरा पन्ना अपलोड होता, तो विभाग को उनकी असलियत का तुरंत पता चल जाता। इसे विभाग को गुमराह करने की एक सोची-समझी साजिश बताया जा रहा है।
देवरिया का चरित्र प्रमाण पत्र और गोरखपुर में लाखों का भुगतान
एक अन्य बड़ा विरोधाभास यह सामने आया है कि टेंडर में जो चरित्र प्रमाण पत्र लगाया गया है, वह जनपद देवरिया (ग्राम विशुनपुरा, थाना सलेमपुर) से जारी किया गया है।
जबकि ठेकेदार वर्षों से गोरखपुर में रहकर काम कर रहे हैं और उनके अन्य तमाम दस्तावेज गोरखपुर के हैं।
देवरिया से बने चरित्र प्रमाण पत्र का गोरखपुर के स्थानीय स्तर पर कोई सत्यापन नहीं कराया गया, और इसी के सहारे विभिन्न सर्किल्स में टेंडर हथियाकर लाखों-करोड़ों रुपये का भुगतान कराया जाता रहा।
मची खलबली, उच्च स्तरीय जांच और कार्रवाई की मांग
इस वायरल पत्र के सामने आने के बाद विद्युत विभाग के भीतर अंदरखाने हड़कंप मच गया है। प्रार्थी शत्रुधन सिंह ने इस मामले की प्रति प्रबंध निदेशक (पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड, वाराणसी), तकनीकी निदेशक (वाराणसी) और क्षेत्र के दोनों मुख्य अभियंताओं को भेजकर उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।
अब सवाल यह उठ रहा है कि:
क्या विद्युत विभाग के स्थानीय अधिकारियों की मिलीभगत के बिना कोई व्यक्ति सालों साल सरकारी आवास में रहकर ठेकेदारी चला सकता है?
क्या गोरखपुर के सभी सर्किल्स में ऐसे अन्य ठेकेदारों की भी संलिप्तता है जो कागजों में हेरफेर कर मोटी रकम डकार रहे हैं?
शिकायतकर्ता ने मांग की है कि àq1 वीरेन्द्र किशोर पाण्डेय द्वारा प्रस्तुत समस्त दस्तावेजों की गहन जांच हो, उनके द्वारा संपादित किए जा रहे कार्यों व टेंडरों को तत्काल प्रभाव से निरस्त/प्रतिबंधित किया जाए तथा इस बड़े खेल में शामिल जिम्मेदारों पर कड़ी विभागीय व कानूनी कार्रवाई की जाए।
पूर्वांचल के नगत एमडी संदीप कुमार के सामने एक और बड़ी चुनौती!
गोरखपुर विद्युत विभाग का यह बहुचर्चित मामला अब पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड के नवनियुक्त प्रबंध निदेशक संदीप कुमार के सामने एक अग्निपरीक्षा बनकर खड़ा हो गया है। जानकारों का मानना है कि विभागीय भ्रष्टाचार और कागजी हेराफेरी के ऐसे कई खेल सालों से बिना स्थानीय अधिकारियों की साठगांठ के फल-फूल नहीं सकते। हालांकि, जानकारों का यह भी कहना है कि एमडी साहब अब तक ऐसे मामलों में अपेक्षित सख्ती और कड़े प्रशासनिक कदम उठाने में पूरी तरह सफल नहीं हो पाए हैं, जिससे निचले स्तर के भ्रष्ट तंत्र के हौसले बुलंद हैं। अब देखना यह होगा कि क्या नवनियुक्त एमडी इस हाई-प्रोफाइल फर्जीवाड़े का संज्ञान लेते हुए ठेकेदार और संरक्षकों पर नकेल कस पाते हैं, या फिर यह मामला भी फाइलों के दलदल में दबकर रह जाएगा?






