उत्तर प्रदेश में जमीन पैमाइश की नई क्रांति: जंजीर-फीते का दौर खत्म, 504 रोवर से डिजिटल होगा राजस्व सर्वेक्षण

लखनऊ15सितंबर :उत्तर प्रदेश में भूमि विवादों के निपटारे और पैमाइश की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए योगी सरकार ने राजस्व सर्वेक्षण को पूरी तरह से हाईटेक कर दिया है। अब खेतों की पैमाइश जंजीर या फीते से नहीं, बल्कि आधुनिक जीएनएसएस (GNSS) रोवर तकनीक से की जाएगी। इस पहल से न सिर्फ 1 से 5 सेंटीमीटर तक की सटीक पैमाइश संभव होगी, बल्कि सर्वेक्षण के दौरान किसानों की फसलों को होने वाले नुकसान से भी मुक्ति मिलेगी।
राजस्व विभाग के पास उपलब्ध कुल 504 जीएनएसएस रोवर में से 350 रोवर तहसीलों में तैनात कर दिए गए हैं, जहां इनसे काम भी शुरू हो चुका है। इसके अलावा 143 रोवर का इस्तेमाल 10 शहरी स्थानीय निकायों (ULB) की नक्शा परियोजनाओं में किया जा रहा है। लेखपालों को इस तकनीक में निपुण बनाने के लिए प्रशिक्षण संस्थानों के जरिए ट्रेनिंग प्रक्रिया भी पूरी कर ली गई है। हरदोई स्थित चकबंदी प्रशिक्षण केंद्र (KTS) में भी दो रोवर लगाए गए हैं।
सहारनपुर से हुई थी महा-अभियान की शुरुआत राजस्व परिषद की आयुक्त एवं सचिव कंचन वर्मा ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 1 जुलाई को सहारनपुर से धारा-24 के तहत भूमि विवादों के त्वरित निस्तारण के लिए महा-अभियान की शुरुआत की थी। इस अभियान को प्रभावी बनाने के लिए विभाग ने एक एसओपी (SOP) जारी की थी। अब रोवर तकनीक के जुड़ने से सीमांकन और पैमाइश के मामलों के निपटारे में अभूतपूर्व तेजी आएगी।
जीएनएसएस रोवर तकनीक के प्रमुख फायदे:
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सेंटीमीटर स्तर की सटीकता: उपग्रह प्रणालियों (Satellite Network) से जुड़कर रोवर किसी भी जमीन के मुख्य बिंदुओं के डिजिटल निर्देशांक (Coordinates) दर्ज करता है। इससे 1 से 5 सेंटीमीटर तक की सटीक पैमाइश होती है और सॉफ्टवेयर की मदद से क्षेत्रफल व नक्शा तुरंत तैयार हो जाता है।
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मानवीय भूल और विवादों पर लगाम: पैमाइश का डेटा पूरी तरह डिजिटल होने के कारण मानवीय गलतियों और मिलीभगत की गुंजाइश खत्म होगी, जिससे जमीन से जुड़े आपसी विवाद कम होंगे।
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फसलों की सुरक्षा: पारंपरिक पैमाइश में खेतों के बीच बार-बार आवाजाही से खड़ी फसलों को नुकसान पहुंचता था। अब सिर्फ मुख्य बिंदुओं के डिजिटल कोऑर्डिनेट्स लेकर बिना खेतों को नुकसान पहुंचाए सर्वेक्षण पूरा हो जाता है।
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समय और श्रम की बचत: बड़े भू-भाग का सर्वेक्षण अब कम जनशक्ति और बेहद कम समय में पूरा किया जा सकेगा।
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पारदर्शी डिजिटल रिकॉर्ड: रोवर से जुटाए गए डेटा को सीधे जीआईएस (GIS) और डिजिटल लैंड रिकॉर्ड सिस्टम से जोड़ा जा रहा है, जिससे रिकॉर्ड पूरी तरह से सुरक्षित और पारदर्शी रहेंगे।






