पॉवर कॉरपोरेशन प्रबंधन के ‘मनमानेपन’ के खिलाफ बिजली कर्मियों में रोष, संघर्ष समिति ने दी चेतावनी

लखनऊ 07 जून :उत्तर प्रदेश विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारियों ने पॉवर कॉरपोरेशन प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाते हुए मोर्चा खोल दिया है। समिति का कहना है कि भीषण गर्मी के बीच जहाँ बिजली कर्मी दिन-रात एक कर निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित कर रहे हैं, वहीं प्रबंधन संवाद करने के बजाय उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियों में जुटा है।
शासन के निर्देशों की अनदेखी का आरोप
संघर्ष समिति ने एक बयान जारी कर कहा कि प्रबंधन न तो स्थापित नियमावलियों का पालन कर रहा है और न ही शासन व जनप्रतिनिधियों के निर्देशों का सम्मान। समिति के अनुसार:
मुख्यमंत्री एवं जनप्रतिनिधियों की सराहना: एक ओर माननीय मुख्यमंत्री और विधायक (जैसे लखनऊ पूर्व के ओ पी श्रीवास्तव) बिजली कर्मियों के समर्पण की प्रशंसा कर रहे हैं, वहीं प्रबंधन का रवैया इसके विपरीत है।
संविदा कर्मियों की बहाली पर रोक: वित्त मंत्री और ऊर्जा मंत्री के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद 25,000 से अधिक हटाए गए संविदा कर्मियों को अब तक वापस नहीं लिया गया है, जिससे बिजली व्यवस्था और उपभोक्ताओं पर बुरा असर पड़ रहा है।
दमनकारी नीतियां: पूर्वांचल और दक्षिणांचल वितरण निगमों के निजीकरण विरोध के समय से ही हजारों अभियंताओं व कर्मियों के स्थानांतरण, वेतन रोकने और पदोन्नति रोकने जैसी कार्रवाइयां जारी हैं।
तीन साल से वार्ता पर लगा है ‘ब्रेक‘
समिति ने इस बात पर गहरा असंतोष व्यक्त किया कि मुख्य सचिव के स्पष्ट निर्देशों के बाद भी पिछले तीन वर्षों में पॉवर कॉरपोरेशन के अध्यक्ष ने संघर्ष समिति के साथ कोई सार्थक वार्ता नहीं की है। ऊर्जा मंत्री द्वारा 19 मार्च 2023 को दिए गए निर्देशों (दंडात्मक कार्रवाइयां वापस लेने हेतु) का भी पालन अब तक नहीं किया गया है।
“बिजली कर्मी उपभोक्ताओं के हित में निर्बाध आपूर्ति को प्राथमिकता देते हैं, लेकिन प्रबंधन के इस मनमाने और उत्पीड़नात्मक व्यवहार को अब सहन नहीं किया जाएगा।” — विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति
प्रमुख मांगें:
संघर्ष समिति ने प्रबंधन और सरकार के समक्ष निम्नलिखित प्रमुख मांगें रखी हैं:
संविदा बहाली: हटाए गए सभी 25,000+ संविदा कर्मियों की तत्काल कार्य पर वापसी।
दंडात्मक कार्यवाही की वापसी: मार्च 2023 के आंदोलन के दौरान और उसके बाद की गई सभी उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियां, चार्जशीट और रुके हुए वेतन को बहाल करना।
ढांचागत सुधार: विफल साबित हो चुकी ‘वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग’ व्यवस्था को तत्काल समाप्त किया जाए।
द्विपक्षीय संवाद: श्रमिक संगठनों के साथ नियमित और सकारात्मक वार्ता का दौर शुरू हो।
समिति ने स्पष्ट किया है कि यदि प्रबंधन का यही रवैया रहा, तो आने वाले समय में बिजली कर्मियों का असंतोष व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।






