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रायबरेली: बदहाल बिजली व्यवस्था सुधारने के लिए चाहिए ‘अतिरिक्त मैनपावर’, तो फिर मुख्य अभियंता क्यों कर रहे संविदा कर्मियों की ‘छंटनी’?

भीषण गर्मी और ओवरलोडिंग से धड़ाधड़ फुंक रहे ट्रांसफार्मर, जनता त्रस्त; फिर भी फील्ड से अनुभवी 62 संविदा कर्मियों को बाहर करने का फरमान जारी, कर्मचारियों में भारी आक्रोश।

रायबरेली 07जून :उत्तर प्रदेश इस समय इतिहास की सबसे भीषण गर्मी और बिजली संकट से जूझ रहा है। ट्रांसफार्मर ओवरलोड होकर आग उगल रहे हैं, तार टूट रहे हैं और जनता बूंद-बूंद पानी व बिजली के लिए त्राहि-त्राहि कर रही है। जमीनी हकीकत यह है कि इस बदहाल बिजली व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए इस समय विभाग को ‘अतिरिक्त मैनपावर’ और अतिरिक्त हाथों की सख्त जरूरत है, ताकि फॉल्ट को जल्द से जल्द ठीक किया जा सके।

लेकिन, धरातल की इस गंभीर स्थिति से दूर, रायबरेली के मुख्य अभियंता कार्यालय से निकला एक सरकारी पत्र विभाग के ही दावों की पोल खोल रहा है। जब फील्ड पर ज्यादा से ज्यादा कर्मचारियों की जरूरत है, तब मुख्य अभियंता द्वारा जारी पत्र के जरिए मण्डल के 62 संविदा कर्मियों को ‘मानक से अधिक’ बताकर हटाने का अल्टीमेटम दे दिया गया है।

जनता त्रस्त, संविदा कर्मी दे रहे जान… फिर ये छंटनी क्यों?

स्थानीय लोगों और संविदा संगठनों का कहना है कि भीषण गर्मी में लगातार 18-18 घंटे काम करने के बाद भी लाइनमैन कम पड़ रहे हैं। कई जगहों पर संविदा कर्मी अपनी जान जोखिम में डालकर, बिना सुरक्षा उपकरणों के खंभों पर चढ़ रहे हैं और दुर्घटनाओं का शिकार हो रहे हैं।

ऐसे संवेदनशील समय में जब सरकार का पूरा जोर निर्बाध आपूर्ति पर होना चाहिए, मुख्य अभियंता द्वारा ऊंचाहार, सलोन, डलमऊ और लालगंज खण्डों से कुशल और अकुशल संविदा कर्मियों की छंटनी करने का एजेंडा चलाया जा रहा है। पत्र में साफ लिखा गया है कि मानक के अनुसार 364 कर्मचारी होने चाहिए, जबकि 426 तैनात हैं, इसलिए इन 62 ‘अतिरिक्त’ कर्मचारियों को रखने पर अधिकारियों से 7 दिन के भीतर स्पष्टीकरण मांगा गया है।

बड़ा सवाल:

जब बिजली व्यवस्था खुद वेंटिलेटर पर है और फॉल्ट सुधारने में घंटों लग रहे हैं, तो अधिकारियों को कर्मचारी ‘अतिरिक्त’ कैसे नजर आ रहे हैं?

क्या कागजी ‘मानक’ जनता की सहूलियत और संविदा कर्मियों के रोजगार से बड़े हो गए हैं?

अधिकारियों की लापरवाही से धूमिल हो रही सरकार की छवि

एक तरफ सूबे के मुख्यमंत्री और ऊर्जा मंत्री लगातार मंचों से घोषणा कर रहे हैं कि बिजली व्यवस्था में कोई कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और कर्मचारियों को हर संभव मदद दी जाएगी। वहीं दूसरी तरफ, रायबरेली के मुख्य अभियंता का यह कदम सीधे तौर पर सरकार की नीतियों को चुनौती दे रहा है।

इस संवेदनहीन रवैये से संविदा कर्मियों में भारी आक्रोश है। कर्मचारियों का कहना है कि:

“जब संकट का समय है, तो हमारा मनोबल बढ़ाने के बजाय हमें बेरोजगार करने की धमकी दी जा रही है।”

“अगर इस भीषण गर्मी में अनुभवी फील्ड स्टाफ को हटाया गया, तो पूरी बिजली व्यवस्था ध्वस्त हो जाएगी और इसकी सीधी जिम्मेदारी मुख्य अभियंता की होगी।”

एसी कमरों में बैठकर कागजी आंकड़ों का मिलान करने वाले अधिकारियों को शायद अंदाजा नहीं है कि धूप में तपती जनता और खंभे पर चढ़ता लाइनमैन किस दौर से गुजर रहा है।

अतिरिक्त मैनपावर बढ़ाने के बजाय की जा रही यह छंटनी न सिर्फ बिजली व्यवस्था को गर्त में ले जाएगी, बल्कि बेरोजगार होते युवाओं का गुस्सा सरकार की छवि को भी भारी नुकसान पहुंचाएगा। अब देखना यह है कि शासन इस आत्मघाती आदेश पर कब संज्ञान लेता है।

मध्यांचल एमडी की ईमानदारी बनाम मुख्य अभियंता की तानाशाही: उठे गंभीर सवाल

अब सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि क्या मध्यांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड की ईमानदार प्रबंध निदेशक का ध्यान मुख्य अभियंता की इस खुली तानाशाही और संवेदनहीन कार्यप्रणाली पर जाएगा?

एक तरफ जहां एमडी साहिबा खुद प्रदेश की विद्युत व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त करने और उपभोक्ताओं को निर्बाध आपूर्ति देने के लिए पूरी ईमानदारी से रात-दिन मॉनिटरिंग कर रही हैं, वहीं दूसरी तरफ उनके ही मातहत अधिकारी उनके प्रयासों पर पानी फेरने में तुले हैं।

इस भयानक हीटवेव (Heatwave) के दौर में, जब पूरे प्रदेश में फॉल्ट अटेंड करने के लिए अतिरिक्त मैनपावर बढ़ाने की सख्त जरूरत है, तब मुख्य अभियंता द्वारा अनुभवी संविदा कर्मियों की छंटनी का ऐसा आत्मघाती आदेश जारी करना किसी की भी समझ से परे है।

क्या विभाग के आला अधिकारी इस गंभीर मामले का संज्ञान लेकर मुख्य अभियंता के इस मनमाने रवैये पर रोक लगाएंगे, या फिर इस भीषण गर्मी में रायबरेली की जनता को पूरी तरह अंधकार में धकेल दिया जाएगा?

यह देखना अभी बाकी है।

Prabandh Sampadak chandrashekhar Singh

Prabhand Sampadak Of Upbhokta ki Aawaj.

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