विद्युत विभाग :अडानी प्रोजेक्ट या अफसरों की ‘कमीशन’ लाइन? 33 किमी लंबी लाइन से खंभों के नंबर गायब, ताक पर क्वालिटी सेल? JE से लेकर अधिशासी अभियंता तक घेरे में, किस’अदृश्य’ फोन कॉल पर हुआ खेल?

मिर्जापुर/वाराणसी 14सितंबर :पूर्वांचल डिस्कॉम के तहत अडानी पावर प्रोजेक्ट के लिए 33KV लाइन बिछाने का काम इन दिनों ‘सुपरविजन’ मद में युद्ध स्तर पर जारी है।
लेकिन जैसे-जैसे ज़मीन पर खंभे गड़ रहे हैं, कागज़ों पर हुए फर्जीवाड़े की बदबू और तेज़ होती जा रही है। ‘उपभोक्ता आवाज’ के पहले खुलासे के बाद हड़कंप मचा ही था कि अब निर्माणाधीन प्रोजेक्ट की फाइलों से एक और सनसनीखेज कारनामा सामने आया है।
1 पन्ने में 33 किमी का नक्शा, धरातल से खंभों के नंबर गायब!
इंजीनियरिंग के मानकों को धत्ता बताते हुए महकमे के बाज़ीगरों ने कागजी लीपापोती का ऐसा खेल रचा है, जिसे देखकर खुद जांच अधिकारी हैरान हैं:
महज 1 पेज का ‘जादुई’ डायग्राम:
33 किलोमीटर लंबी हाई-टेंशन लाइन के एस्टीमेट का ‘सिंगल लाइन डायग्राम’ अफसरों ने खेल-खेल में महज एक पन्ने पर निपटा दिया।
न फाइलों में नंबर, न खंभों पर:
नियम कहता है कि हर पोल की प्रॉपर मैपिंग और नंबरिंग अनिवार्य है। लेकिन यहाँ न तो 1 पन्ने के डायग्राम में पोल नंबरिंग दर्ज है और न ही धरातल पर गाड़े जा रहे खंभों पर कोई नंबर डाला जा रहा है।
JE से लेकर EE तक… स्थानीय अफसरों का सिंडिकेट घेरे में!
ज़मीन और फाइल दोनों जगह से पोल नंबरिंग का गायब होना कोई इत्तेफाक नहीं, बल्कि सुनियोजित विभागीय खेल की तरफ इशारा कर रहा है।
साइट पर चल रहे निर्माण कार्य और कागज़ी बाजीगरी ने सीधे तौर पर स्थानीय अधिकारियों की भूमिका पर बड़ा सवालिया निशान लगा दिया है। फील्ड में निगरानी कर रहे JE,AE,से लेकर अधिशासी अभियंता तक पूरा का पूरा अमला अब सीधे तौर पर जांच और संशय की ज़द में है। आखिर इन जिम्मेदार अफसरों की नाक के नीचे इतना बड़ा फर्जीवाड़ा कैसे चल रहा है?
एक फोन कॉल पर बदले कायदे, e-Way Bill और क्वालिटी ताक पर
इस पूरे खेल के पीछे किसी बेहद रसूखदार ‘आका’ का हाथ बताया जा रहा है। सूत्रों की मानें तो:
अदृश्य ‘पावरफुल’ फोन:
किसी रसूखदार के एक फोन कॉल के बाद सालों पुरानी टेक्निकल गाइडलाइन्स और अप्रूवल प्रक्रियाओं को रातों-रात कचरे के डिब्बे में फेंक दिया गया।
बिना जांच और बिल के सामान पास?
साइट पर आ रही सामग्री के लिए न तो अनिवार्य e-Way Bill की परवाह की गई और न ही क्वालिटी अप्रूवल के मानकों को देखा गया। बस आंखें मूंदकर हर सामान को हरी झंडी दी जा रही है।
‘सुपरविजन’ के नाम पर खुली लूट?
अडानी प्रोजेक्ट के नाम पर सुपरविजन चार्ज में बन रही यह लाइन अब भ्रष्टाचार का प्रतीक बनती जा रही है। बिना वैध e-Way Bill, बिना क्वालिटी चेक और बिना पोल नंबरिंग के चल रहा यह निर्माण कार्य इशारा कर रहा है कि कैसे ठेकेदार और अफसरों का सिंडिकेट मिलकर सरकारी तिजोरी पर डाका डाल रहा है।
अगले अंक में बड़ा विस्फोट:
किस ताकतवर शख्स के फोन घनघनाते ही बदल गई थी क्वालिटी सेल की रिपोर्ट?
JE-EE सिंडिकेट और बिना ay Bill माल खपाने वाले सप्लायर्स का सच!
बने रहिए—’उपभोक्ता आवाज’ के साथ, बेनकाब होंगे नाम और चेहरे!
भ्र्ष्टाचार और भ्र्ष्टाचारियो के विरुद्ध युद्ध अभी शेष है।






