सपा का ’75 जिले, 75 विजन’ दांव: 2027 के चुनाव में खत्म होगी पूरे प्रदेश के एक घोषणा-पत्र की परंपरा, अखिलेश जारी करेंगे ‘माइक्रो मेनिफेस्टो’

लखनऊ14सितंबर :उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की बिसात पर समाजवादी पार्टी (सपा) एक बड़ा और लीक से हटकर राजनीतिक प्रयोग करने जा रही है। पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव के दौर से चली आ रही ‘पूरे प्रदेश के लिए एक घोषणा-पत्र’ की दशकों पुरानी परंपरा को दरकिनार करते हुए सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने ‘माइक्रो-लेवल’ चुनावी रणनीति का खाका तैयार किया है। पार्टी इस बार पूरे राज्य के लिए एक सांचा बनाने के बजाय उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों के लिए अलग-अलग एक्सक्लूसिव चुनावी मेनिफेस्टो जारी करेगी।
सपा की इस नई रणनीति का मुख्य मकसद
मतदाताओं से यह कहने के बजाय कि ‘हम पूरे प्रदेश में क्या करेंगे’, सीधे यह संवाद साधना है कि ‘हम आपके जिले में क्या नया लाएंगे’। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि बुंदेलखंड, पूर्वांचल और पश्चिमी यूपी के जिलों की भौगोलिक, सामाजिक और आर्थिक चुनौतियां एक-दूसरे से बिल्कुल अलग हैं, इसलिए चुनावी वादे भी विशुद्ध रूप से स्थानीय जरूरतों पर केंद्रित होने चाहिए।
जिला स्तर पर तीन बिंदुओं पर मांगा गया कच्चा-चिट्ठा
अखिलेश यादव ने इस जमीनी रणनीति को धरातल पर उतारने के लिए पार्टी की सभी जिला कमेटियों और स्थानीय नेताओं को विशेष दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। जिला स्तरीय पदाधिकारियों से अपने-अपने क्षेत्र का गहन अध्ययन कर शीर्ष नेतृत्व को रिपोर्ट भेजने को कहा गया है। इस रिपोर्ट के लिए तीन मुख्य बिंदु तय किए गए हैं:
5 सबसे बड़ी स्थानीय समस्याएं: पेयजल, सीवरेज, जर्जर सड़कें या बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी जिले की 5 मुख्य चुनौतियां।
अधूरे व बंद पड़े प्रोजेक्ट्स: पूर्व में मंजूर या शुरू की गई ऐसी विकास योजनाएं जो फिलहाल ठप या अधर में लटकी हैं।
स्थानीय स्तर पर रोजगार का मॉडल: जिले के पारंपरिक उद्योगों, कुटीर उद्योगों और स्थानीय बाजार के आधार पर युवाओं को वहीं पर रोजगार देने की योजना।
पारंपरिक मेनिफेस्टो से हटकर ‘लोकल कनेक्ट’ की कवायद
अब तक सूबे के राजनीतिक दल चुनाव के दौरान एक ही राज्यस्तरीय घोषणा-पत्र जारी करते रहे हैं, जिसमें बड़े-बड़े वादे और नीतिगत बातें शामिल होती थीं। हालांकि, सपा के इस ’75 जिले, 75 विजन’ वाले दांव से स्थानीय मुद्दे सीधे चुनावी केंद्र में आ जाएंगे।
राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार, बंद पड़ी लोकल मिलों, उपेक्षित कुटीर उद्योगों और अटकाव का शिकार बनी स्थानीय ढांचागत परियोजनाओं को सीधे मेनिफेस्टो का हिस्सा बनाकर सपा मतदाताओं के साथ सीधा व्यावहारिक और भावनात्मक जुड़ाव बनाने की कोशिश में है। सपा का यह ‘माइक्रो मेनिफेस्टो’ मॉडल 2027 के रण में कितना कारगर साबित होगा, यह तो वक्त तय करेगा, लेकिन इस नई रणनीति ने राज्य के सियासी गलियारों में नई हलचल जरूर पैदा कर दी है।






