तीज पर गणेश चौथ का दुर्लभ संयोग: अखंड सौभाग्य के लिए महिलाओं ने रखा निर्जला व्रत, मंदिरों में उमड़ी भीड़

वाराणसी 14सितंबर :भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि पर आज देशभर में हरितालिका तीज का पर्व अपार श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। सुहागिन महिलाएं पति की लंबी उम्र, सुखी दांपत्य जीवन और अखंड सौभाग्य की कामना को लेकर कठिन निर्जला व्रत रख रही हैं, वहीं अविवाहित कन्याएं योग्य वर की प्राप्ति के लिए माता पार्वती और भगवान शिव की आराधना कर रही हैं।
इस बार तीज व्रत पर गणेश चौथ (संकष्टी श्री गणेश चतुर्थी) का विशेष और अत्यंत शुभ संयोग बन रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान गणेश माता पार्वती और देवों के देव महादेव के पुत्र होने के कारण प्रथम पूज्य हैं। किसी भी शुभ कार्य या पूजा से पहले विघ्नहर्ता श्री गणेश की आराधना करने से जीवन की सभी बाधाएं दूर होती हैं। तीज के साथ गणेश जी के इस पावन संयोग ने पूरे माहौल को और अधिक भक्तिमय बना दिया है।
कठोर तपस्या और अटूट श्रद्धा का प्रतीक
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए वर्षों तक अन्न-जल त्यागकर अत्यंत कठोर तपस्या की थी। माता पार्वती की इस अटूट श्रद्धा और तप से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार किया था। इसी पौराणिक प्रसंग का स्मरण करते हुए सदियों से महिलाएं तीज का व्रत रखती आ रही हैं।
मंदिरों और घरों में गूंजे शिव-पार्वती के जयकारे
आज तड़के से ही शिवालयों और घरों में पूजा-अर्चना का दौर जारी है। महिलाएं पारंपरिक परिधानों और 16 श्रृंगार में सज-धज कर बालू या मिट्टी से भगवान शिव, माता पार्वती और श्री गणेश की मूर्तियां बनाकर विधिवत पूजा कर रही हैं। पूजा के दौरान तीज व्रत कथा का पाठ किया जा रहा है और फल, फूल, सुहाग की सामग्री (सिंदूर, चूड़ियां, बिंदी) माता पार्वती को अर्पित की जा रही है।
श्रद्धालु इस पावन अवसर पर अपने परिवार की सुख-समृद्धि, निरोगी काया और मनोकामना पूर्ति के लिए प्रार्थना कर रहे हैं। दिनभर व्रत रखने के बाद महिलाएं रातभर जागरण कर भजन-कीर्तन करेंगी और अगले दिन सूर्योदय के बाद पारण कर व्रत को पूर्ण करेंगी।






