सीएम पद का फैसला लोकतांत्रिक तरीके से, विधायक और नेतृत्व करेंगे तय: साक्षी महाराज

उन्नाव 15सितंबर : उन्नाव से भारतीय जनता पार्टी के सांसद साक्षी महाराज ने मुख्यमंत्री पद के चयन, 2027 के विधानसभा चुनाव और ब्रिक्स शिखर सम्मेलन समेत विभिन्न समसामयिक मुद्दों पर मीडिया के सामने पार्टी का रुख स्पष्ट किया। अपने आवास पर पत्रकारों से बातचीत करते हुए साक्षी महाराज ने कहा कि मुख्यमंत्री कौन बनेगा, इसका फैसला किसी एक व्यक्ति के हाथ में नहीं होता।
लोकतांत्रिक प्रक्रिया से होगा मुख्यमंत्री का चयन
साक्षी महाराज ने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री का चुनाव पूर्ण रूप से लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत किया जाता है। जनता द्वारा निर्वाचित विधायक बैठक कर इसका निर्णय लेते हैं। उन्होंने कहा कि यदि पार्टी के विधायकों और शीर्ष नेतृत्व की सहमति बनती है, तो उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ही होंगे।
2027 में 300 से अधिक सीटों का लक्ष्य
आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव पर चर्चा करते हुए भाजपा सांसद ने कहा कि उनकी पार्टी हमेशा चुनावी मोड में रहती है और केंद्रीय नेतृत्व ने 2027 के चुनाव की तैयारियां शुरू कर दी हैं। पार्टी ने इस बार 300 से अधिक सीटें जीतने का लक्ष्य रखा है। उन्होंने दावा किया कि विपक्ष का कोई भी नेता—चाहे अखिलेश यादव हों, मायावती, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी या असदुद्दीन ओवैसी—भाजपा के प्रदर्शन पर कोई असर नहीं डाल पाएगा।
कानून-व्यवस्था और विरोधियों पर निशाना
पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए साक्षी महाराज ने कहा कि उनके शासनकाल में तुष्टीकरण की राजनीति हावी थी और कानून-व्यवस्था नाम की कोई चीज नहीं थी। आज पूरे देश में ‘यूपी मॉडल’ की सराहना हो रही है। विनोद साहनी हत्याकांड पर उन्होंने कहा कि प्रशासन ने तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है और यहां जाति देखकर फैसले नहीं किए जाते।
ब्रिक्स सम्मेलन में वैश्विक मंच पर भारत का दबदबा
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की सफलता की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने वैश्विक पटल पर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है। सम्मेलन में मांसाहारी भोजन न परोसे जाने पर विपक्ष द्वारा उठाए गए सवालों पर चुटकी लेते हुए साक्षी महाराज ने कहा, “मोदी है तो मुमकिन है; विदेशी मेहमानों को भारत के शुद्ध शाकाहारी भोजन का स्वाद मिला है।” उन्होंने ईरान के राष्ट्रपति द्वारा कानपुर के धर्माचार्य के चरण स्पर्श करने की घटना को सनातन संस्कृति का बड़ा संदेश बताया।






