सिद्धार्थनगर विद्युत विभाग का काला सच: सेवानिवृत्त चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के GPF के 29 लाख हड़पने का मामला साबित, मुख्य अभियंता बस्ती के ‘अभयदान’ और लीपापोती से मचा हड़कंप!

सिद्धार्थनगर 31अक्टूबर :पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड के सिद्धार्थनगर डिवीजन से एक बेहद दहला देने वाला और सिस्टम को झकझोर देने वाला मामला सामने आया है। सेवानिवृत्त चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी राम सरन के भविष्य निधि और गाढ़ी कमाई के लगभग 29 लाख रुपये हड़पने के संगीन मामले में जांच समिति ने आरोपी बाबू कार्यकारी सहायक राजेश कुमार श्रीवास्तव को दोषी करार दे दिया है। इसके बावजूद विभागीय स्तर पर मिल रहे संरक्षण और मुख्य अभियंता बस्ती द्वारा कथित रूप से ‘अभयदान’ दिए जाने की चर्चा ने पूरे महकमे में भूचाल ला दिया है।
जांच में साबित हुई घपलेबाजी, सामने आए चौंकाने वाले आंकड़े
प्रारंभिक जांच आख्या के अनुसार, यह साफ हो गया है कि सेवानिवृत्त श्रमिक रामसरन के बैंक खाते से पैसे निकालकर कार्यकारी सहायक राजेश कुमार श्रीवास्तव के बैंक खाते (खाता संख्या- 3461620177) में अवैध तरीके से ट्रांसफर किए गए थे। जांच में निम्नलिखित तिथियों पर भारी रकम ट्रांसफर होने की पुष्टि हुई है:
07.01.2023: ₹4,33,000 (चार लाख तैंतीस हजार रुपये)
01.02.2024: ₹10,00,000 (दस लाख रुपये)
09.02.2024: ₹7,05,000 (सात लाख पांच हजार रुपये)
04.03.2024: ₹20,000 (बीस हजार रुपये)
जांच आख्या में स्पष्ट रूप से निष्कर्ष निकाला गया है कि रामसरन द्वारा राजेश कुमार श्रीवास्तव पर लगाए गए सभी आरोप सत्य प्रतीत होते हैं और कार्यकारी सहायक इस मामले में पूरी तरह दोषी हैं।
क्या चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी को रिटायरमेंट के बाद भी अपना पैसा नहीं मिलेगा?
यह सवाल अब सबसे बड़ा मानवीय और प्रशासनिक मुद्दा बन गया है कि क्या एक गरीब चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी जीवनभर ईमानदारी से नौकरी करने के बाद अपनी ही पाई-पाई के लिए दर-दर भटकने को मजबूर रहेगा?
जांच में खुलासा हुआ कि जब पीड़ित रामसरन ने अपने हक के पैसों के लिए आवाज उठाई और न्याय की गुहार लगाई, तो आरोपी बाबूओं और कर्मचारियों द्वारा उन्हें लगातार डराया-धमकाया गया। यहाँ तक कि जांच को प्रभावित करने और शिकायत वापस लेने के लिए दबाव बनाया गया। न्याय न मिलने, मानसिक प्रताड़ना और इलाज के अभाव में 22 अगस्त 2026 को रामसरन की दर्दनाक मृत्यु हो गई। हालात इतने बदतर थे कि एक मृत कर्मचारी की पत्नी को अंतिम संस्कार के लिए लोगों से भीख और चंदा मांगना पड़ा।
मुख्य अभियंता बस्ती की भूमिका और ‘अभयदान’ पर उठ रहे सवाल
एक तरफ जहां जांच समिति ने आरोपी बाबू को दोषी ठहरा दिया है, वहीं दूसरी तरफ प्रशासनिक गलियारों में इस बात की चर्चा जोर-शोर से है कि इस पूरे खेल में मुख्य अभियंता (बस्ती) स्तर से कथित तौर पर ‘अभयदान’ देकर मामले को दबाने या बचाने की कोशिश की जा रही है। जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद भी दोषियों पर कड़ी विभागीय व दंडात्मक कार्रवाई न होना और मुख्य अभियंता कार्यालय के स्तर से मिल रही ढील ने उच्चाधिकारियों की कार्यशैली पर गंभीर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं।
पीड़ित परिवार और न्यायप्रिय नागरिकों का सवाल है कि क्या भ्रष्टाचार के पुख्ता सबूत मिलने और एक गरीब कर्मचारी की जान जाने के बाद भी दोषियों को यूं ही बचाया जाता रहेगा, या फिर मुख्य अभियंता के संरक्षण के इस खेल को तोड़कर दोषियों पर सख्त कानूनी शिकंजा कसा जाएगा?
हाल ही में बस्ती दौरा कर लौटे पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम के प्रबंध निदेशक से यह गंभीर मामला बिल्कुल छिपा लिया गया और उनके सामने यह सच आने नहीं दिया गया। लेकिन अब जब यह काला सच और प्रारंभिक जांच आख्या खुलकर सामने आ चुकी है, तो यह देखना बेहद दिलचस्प और महत्वपूर्ण होगा कि पूर्वांचल प्रबंधन और उच्चाधिकारी इस भ्रष्टाचार और निर्दोष कर्मचारी की मौत के जिम्मेदारों पर क्या सख्त एक्शन लेते हैं।
भ्र्ष्टाचार और भ्र्ष्टाचारियो के विरुद्ध युद्ध अभी शेष है !






