सिद्धार्थनगर विद्युत विभाग में बड़ा भ्रष्टाचार: लेखाकार सोमनाथ प्रजापति और बाबू राजेश श्रीवास्तव की कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर सवाल, वायरल शिकायती पत्र से मचा हड़कंप!

सिद्धार्थनगर 01नवंबर :पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड के सिद्धार्थनगर जिले में तैनात लेखाकार सोमनाथ प्रजापति और बड़े बाबू राजेश श्रीवास्तव की कार्यप्रणाली को लेकर एक सनसनीखेज शिकायती पत्र सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। प्रबंध निदेशक को संबोधित इस पत्र में विभाग के भीतर चल रहे भारी भ्रष्टाचार, मनमानी, अवैध वसूली और गंभीर प्रशासनिक अनियमितताओं की पोल खोली गई है।
वायरल शिकायती पत्र के मुख्य बिंदु!
स्थानांतरण नीति की अवहेलना और रसूख: आरोप है कि लेखाकार सोमनाथ प्रजापति का वर्तमान में विद्युत वितरण खंड-डुमरियागंज एवं विद्युत वितरण खंड-सिद्धार्थनगर में तैनाती है। निर्धारित समयसीमा पूर्ण होने के बाद भी स्थानांतरण नीति के तहत पूर्व में हटाए जाने के बावजूद वे जमे हुए हैं और उनका रसूख इतना बढ़ गया है कि उनके कार्यों पर कोई रोक-टोक नहीं है।
फर्जी भुगतान और बिल रिवीजन का खेल:
शिकायती पत्र में गंभीर आरोप लगाया गया है कि पूर्व में उनके द्वारा बिल रिवीजन, थेफ्ट असेसमेंट और ठेकेदारों के भुगतानों में भारी अनियमितताएं की गईं।
वर्तमान विभागीय सख्ती को देखते कागजातों और पत्रवलियों को गायब किए जाने की बात भी कही गई है ताकि कोई सुराग हाथ न लगे।
स्टेशनरी और कमीशनखोरी के आरोप:
पत्र में यह भी आरोप लगाया गया है कि कागजों पर फर्जी स्टेशनरी खरीद दिखाकर भारी धनराशि हड़पी गई और ठेकेदारों से कमीशनखोरी की जाती है। साथ ही विभागीय मामलों को देखने वाले अधिवक्ता के बिल भुगतान को लेकर भी गंभीर वित्तीय अनियमिताओं का जिक्र किया गया है।
चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के जीपीएफ घोटाले और मौत का गंभीर मामला:
पत्र में सबसे दहला देने वाला आरोप यह है कि सिद्धार्थनगर डिवीजन में तैनात बाबू राजेश श्रीवास्तव द्वारा चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी राम सरन के GPF का लगभग 29 लाख रुपये फर्जी तरीके से अपने खाते में ट्रांसफर करा लिया गया था। जब इसकी शिकायत वकील दुर्गेश नारायण श्रीवास्तव द्वारा की गई, तो आरोपी बाबू सोमनाथ प्रजापति को ही जांच सदस्य बना दिया गया।
आरोप है कि जांच के दौरान लीपापोती करते हुए आरोपियों ने पीड़ित राम सरन के घर जाकर जान से मारने की धमकी दी, जिससे आहत और इलाज के अभाव में 22 अगस्त 2026 को राम सरन की मौत हो गई। पीड़ित परिवार को अंतिम संस्कार के लिए भी चंदा मांगना पड़ा।
एक्सियन ज्ञान प्रकाश और सिंडिकेट पर मिलीभगत के आरोप:
शिकायती पत्र में आरोप लगाया गया है कि लेखाकार सोमनाथ प्रजापति, बड़े बाबू राजेश श्रीवास्तव और एक्सियन ज्ञान प्रकाश की तिकड़ी मिलकर सिर्फ धन उगाही का साम्राज्य चला रही है। चीफ साहब के बार-बार पत्र लिखने के बावजूद एक्सियन द्वारा बाबू राजेश श्रीवास्तव को रिलीव नहीं किया जा रहा है, जो पिछले 10 वर्षों से बिना सिद्धार्थनगर मुख्यालय रुके रोजाना गोरखपुर से अप-डाउन करते हैं।
उच्च स्तरीय जांच की मांग:
वायरल पत्र के माध्यम से प्रबंध निदेशक से मांग की गई है कि इन-तकों की तत्काल प्रभाव से गैर-जिले में ट्रांसफर करते हुए एक उच्च स्तरीय जांच समिति का गठन किया जाए।
साथ ही इनके द्वारा किए गए वित्तीय घोटालों, अवैध संपत्तियों और वैधानिक कृत्यों की गहन जांच कर कठोर कार्रवाई की जाए ताकि प्रताड़ित पीड़ित जनता और मृतक कर्मचारी की आत्मा को न्याय मिल सके।
(नोट: वायरल शिकायती पत्र में लगाए गए इन तमाम गंभीर और सनसनीखेज आरोपों की पुष्टि पोर्टल नहीं करता है, यह पत्र वर्तमान में सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है और विभागीय गलियारों में हड़कंप मचाए हुए है।)






