उत्तर प्रदेश में जल परिवहन को मिलेगी नई दिशा: अंतर्देशीय जलयान नियमावली-2026 के तहत जलयानों का होगा खास पंजीकरण

लखनऊ 28 अक्टूबर: उत्तर प्रदेश की नदियों में जल परिवहन को पूरी तरह सुरक्षित, आधुनिक और व्यवस्थित बनाने की दिशा में योगी सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। गंगा, यमुना, घाघरा, गोमती, गंडक और बेतवा जैसी प्रमुख नदियों में यात्री परिवहन, नदी पर्यटन और पारंपरिक नौका संचालन को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार ‘अंतर्देशीय जलयान नियमावली-2026’ लागू करने जा रही है। इस नई व्यवस्था के तहत अब राज्य के सभी जलयानों को एक विशिष्ट पंजीकरण संख्या मिलेगी, जिससे उनकी पहचान और सुरक्षा पुख्ता हो सकेगी।
यह नई नियमावली वर्ष 2002 के पुराने नियमों का स्थान लेगी और इसे भारत सरकार के अंतर्देशीय जलयान अधिनियम, 2021 के अनुरूप तैयार किया गया है। इसमें कुल 16 अध्याय हैं, जो यंत्रचालित और गैर-यांत्रिक दोनों तरह के जलयानों के लिए नियम तय करते हैं।
जलयानों के लिए होगी खास पंजीकरण संख्या और सर्वेक्षण व्यवस्था
नई व्यवस्था के तहत जलयानों की पारदर्शी निगरानी के लिए कड़े प्रावधान किए गए हैं:
विशिष्ट पंजीकरण नंबर: यंत्रचालित जलयानों को 10 अंकों या अक्षरों की और गैर-यांत्रिक जलयानों को 12 अंकों या अक्षरों की विशिष्ट पंजीकरण संख्या प्रदान की जाएगी।
अधिकारियों की तैनाती: यंत्रचालित जलयानों के पंजीकरण के लिए प्रत्येक जिले में एआरटीओ (प्रशासन) को पंजीकरण अधिकारी बनाया गया है। वहीं, गैर-यांत्रिक जलयानों के लिए जिला स्तर पर मोटरयान निरीक्षक और तहसील स्तर पर सहायक मोटरयान निरीक्षक यह जिम्मेदारी संभालेंगे।
सर्वेक्षण: जलयानों के तकनीकी सर्वेक्षण और मूल्यांकन के लिए राष्ट्रीय अंतर्देशीय नौवहन संस्थान (NINI), पटना को अधिकृत किया गया है।
विकास और कल्याण के लिए दो अलग-अलग निधियां
जल परिवहन से मिलने वाले शुल्क और जुर्माने के पैसों का सदुपयोग करने के लिए सरकार ने दो अलग निधियों के गठन का प्रावधान किया है:
राज्य विकास निधि: यंत्रचालित जलयानों से प्राप्त राजस्व से इस निधि का गठन होगा, जिससे जल परिवहन क्षेत्र का विकास किया जाएगा।
जिला कल्याण निधि: गैर-यांत्रिक जलयानों से जुड़ी गतिविधियों के लिए जिला स्तर पर यह निधि बनेगी, जो मुख्य रूप से नाविकों के कल्याण और उत्थान में काम आएगी।
घाटों पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम और गोताखोर अनिवार्य
यात्रियों की सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए घाटों के संचालन और सुविधाओं के कड़े मानक तय किए गए हैं:
घाटों पर सुविधाएं: सभी प्रमुख घाटों पर स्थायी प्रकाश व्यवस्था (लाइटिंग), स्पष्ट साइनबोर्ड, लाइफ बॉय और प्रशिक्षित गोताखोरों की मौजूदगी अनिवार्य कर दी गई है।
स्थानीय प्रबंधन: घाटों के पट्टे, रख-रखाव और संचालन की जिम्मेदारी स्थानीय निकायों, विकास प्राधिकरणों और जिला समितियों को सौंपी जाएगी।
आपातकालीन बचाव और सुरक्षा के पुख्ता मानक
नाव हादसों को रोकने और आपात स्थिति से निपटने के लिए जिला स्तर पर पुख्ता योजना बनाई गई है:
जिला स्तरीय समिति: जिलाधिकारी की अध्यक्षता में विशेष समिति गठित होगी जो पूरे तंत्र की निगरानी करेगी।
सुरक्षा सामग्री: प्रत्येक यात्रा से पहले यात्रियों को सुरक्षा संबंधी जानकारी देना अनिवार्य होगा। नावों में कुल क्षमता से 10 प्रतिशत अधिक लाइफ जैकेट, 10 मीटर लंबी रस्सी और फर्स्ट एड बॉक्स रखना जरूरी होगा।
रेस्क्यू बोट: किसी भी अनहोनी से निपटने के लिए 1:10 के अनुपात में आपातकालीन बचाव नावें (Emergency Response Vessels) तैनात की जाएंगी।
पुराने संचालकों को मिलेगा समय और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिलेगा संबल
नई नियमावली लागू होने से पहले से चल रहे जलयानों को खुद को नए सुरक्षा मानकों के अनुरूप ढालने के लिए 90 दिन का समय दिया जाएगा। सरकार का मानना है कि इस पारदर्शी और सुरक्षित व्यवस्था से न केवल पर्यटकों और यात्रियों का नदियों में सफर करने पर भरोसा बढ़ेगा, बल्कि नदी पर्यटन, माल ढुलाई और स्थानीय नाविकों की आजीविका को भी एक नया संबल मिलेगा।






