एक झलक

गोरखपुर में बिजली विभाग के ‘अंगद’ बाबू का आतंक: ट्रांसफर नीति को ठेंगा, उपभोक्ताओं का जीना मुहाल

सालों से जमा है डेरा: विद्युत वितरण खंड राप्ती नगर में 2019 से जड़े हैं पैर।

भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप: पूर्व में की गई शिकायतों को विभाग ने किया नजरअंदाज।

स्थानांतरण नीति की खिल्ली: शासन के नियमों को खुली चुनौती दे रहा है आरोपी बाबू।

त्रस्त उपभोक्ता: मनमानी और वसूली से जनता परेशान।

गोरखपुर 02नवंबर :उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन लिमिटेड (UPPCL) की स्थानांतरण नीतियों और जीरो टॉलरेंस के दावों की गोरखपुर में खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। मामला विद्युत वितरण खंड राप्ती नगर का है, जहां तैनात आमोद बाबू (आमोद कुमार) पिछले कई वर्षों से भ्रष्टाचार का पर्याय बन चुके हैं। वर्ष 2019 से एक ही डिवीजन में ‘अंगद के पैर’ की तरह जड़े आमोद बाबू ने विभागीय नियमों और ट्रांसफर पॉलिसी को ताक पर रख रखा है।

शिकायतों पर लीपापोती, हौसले बुलंद

सूत्रों के अनुसार, आमोद बाबू के कार्यकाल और उनके कथित भ्रष्टाचार को लेकर पूर्व में भी उच्चाधिकारियों से कई बार लिखित शिकायतें की जा चुकी हैं। बावजूद इसके, विभागीय रसूख और सांठगांठ के चलते हर बार शिकायतों को दबा दिया गया या नजरअंदाज कर दिया गया। विभागीय संरक्षण मिलने के कारण आरोपी बाबू के हौसले इतने बुलंद हैं कि वह किसी भी नियम-कानून को तवज्जो नहीं देते।

उपभोक्ताओं में त्राहिमाम, मनमानी से लोग परेशान

राप्ती नगर विद्युत वितरण खंड के अंतर्गत आने वाले उपभोक्ता आए दिन इस बाबू की कार्यशैली से त्रस्त नजर आते हैं। उपभोक्ताओं का आरोप है कि बिना सुविधा शुल्क दिए यहां कोई भी वैध काम कराना असंभव सा हो गया है। बिजली बिल संशोधन, नए कनेक्शन, मीटर बदलने या अन्य प्रशासनिक कार्यों के नाम पर उपभोक्ताओं का मानसिक और आर्थिक उत्पीड़न किया जा रहा है।

स्थानांतरण नीति को खुली चुनौती

शासन का स्पष्ट निर्देश है कि एक ही पटल या कार्यालय पर लंबे समय से जमे कर्मचारियों/बाबुओं का अनिवार्य रूप से ट्रांसफर किया जाए, ताकि पारदर्शिता बनी रहे। लेकिन आमोद बाबू ने इस स्थानांतरण नीति को ठेंगा दिखाते हुए अपनी कुर्सी पर ऐसा कब्जा जमा रखा है कि तमाम कोशिशों के बावजूद उनका ट्रांसफर नहीं हो पा रहा है।

क्या होगी कार्रवाई?

क्षेत्र की जनता और पीड़ित उपभोक्ताओं ने एक बार फिर ऊर्जा मंत्री और बिजली निगम के उच्चाधिकारियों से मांग की है कि इस भ्रष्ट बाबू के कार्यकाल की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। साथ ही, तत्काल प्रभाव से इसका अन्यत्र ट्रांसफर कर इसके खिलाफ सख्त विभागीय कार्रवाई अमल में लाई जाए, ताकि विभाग की छवि धूमिल होने से बच सके।

Prabandh Sampadak chandrashekhar Singh

Prabhand Sampadak Of Upbhokta ki Aawaj.

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