जनप्रतिनिधियों और अफसरों की संपत्ति सार्वजनिक करने की मांग: किरण बेदी पहुंचीं दिल्ली हाईकोर्ट, देश भर में कठोर कानून की उठी जरूरत

नई दिल्ली 15सितंबर : देश में प्रशासनिक और राजनीतिक पारदर्शिता को लेकर पूर्व आईपीएस अधिकारी और पुडुचेरी की पूर्व उपराज्यपाल किरण बेदी ने एक बड़ा कदम उठाया है। उन्होंने दिल्ली हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को एक ऑनलाइन याचिका भेजकर मांग की है कि दिल्ली के मौजूदा और पूर्व विधायकों, पार्षदों और एमसीडी (नगर निगम) के वरिष्ठ अधिकारियों की संपत्तियों का पूरा ब्योरा सार्वजनिक किया जाए। बेदी की इस मांग ने न केवल राजधानी, बल्कि पूरे देश में प्रशासनिक जवाबदेही और भ्रष्टाचार विरोधी चर्चा को एक नया मोड़ दे दिया है।
नेताओं और उनके परिवारों की संपत्ति सार्वजनिक करने की मांग किरण बेदी ने अपनी अर्जी में तर्क दिया है कि जनता को यह जानने का पूरा अधिकार है कि उनके द्वारा चुने गए प्रतिनिधि और निकाय संचालन करने वाले अधिकारी पद पर रहते हुए कितनी संपत्ति अर्जित कर रहे हैं। उन्होंने मांग की है कि नेताओं और अफसरों के साथ-साथ उनके परिजनों और आश्रितों के नाम दर्ज अचल व चल संपत्तियों का ब्योरा भी सार्वजनिक पोर्टल पर उपलब्ध कराया जाना चाहिए।
किरण बेदी का मानना है कि केवल चुनाव के समय हलफनामा (Affidavit) दाखिल करना काफी नहीं है। जनप्रतिनिधियों और उच्च अधिकारियों की संपत्ति की नियमित जांच और पारदर्शिता से ही सार्वजनिक जीवन में जवाबदेही तय की जा सकती है।
पूरे देश में सरकारी अधिकारियों को भी शामिल करने की जरूरत विशेषज्ञों और भ्रष्टाचार विरोधी विशेषज्ञों का मानना है कि यह मुद्दा केवल दिल्ली या केवल जनप्रतिनिधियों (नेताओं) तक सीमित नहीं रहना चाहिए। आज के समय में देश भर के सभी राज्यों में एक ऐसा केंद्रीय कानून बनाने की सख्त आवश्यकता है, जो देश के सभी श्रेणियों (ग्रुप A, B, C) के सरकारी अधिकारियों, नौकरशाहों और जनप्रतिनिधियों पर समान रूप से लागू हो।
वर्तमान व्यवस्था में सरकारी तंत्र के भीतर अधिकारियों की संपत्ति का ब्योरा विभाग के बंद कमरों और वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट (ACR) तक ही सीमित रह जाता है। आम जनता के पास यह जानने का कोई सीधा माध्यम नहीं है कि उनके प्रशासनिक क्षेत्रों में कार्यरत अधिकारी और नेता अपने कार्यकाल के दौरान कितनी आय और संपत्ति जोड़ रहे हैं।
एक राष्ट्र, एक पारदर्शिता कानून की मांग नागरिक संस्थाओं (Civil Societies) और कानूनी जानकारों का कहना है कि यदि भारत को भ्रष्टाचार मुक्त बनाना है, तो एक ऐसा राष्ट्रीय कानून (National Transparency Law) लाया जाना चाहिए, जिसके तहत:
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सार्वजनिक डिजिटल पोर्टल: सभी नेताओं, आईएएस, आईपीएस, राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों और निकाय कर्मचारियों की सालाना संपत्ति का ब्योरा एक केंद्रीय पोर्टल पर सार्वजनिक किया जाए।
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पारिवारिक संपत्तियों का खुलासा: केवल संबंधित व्यक्ति ही नहीं, बल्कि उनके बेनामी और पारिवारिक खातों/संपत्तियों की भी निरंतर समीक्षा हो।
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संपत्ति के ऑडिट की पारदर्शी व्यवस्था: यदि किसी प्रतिनिधि या अधिकारी की संपत्ति में उनकी ज्ञात आय से अधिक अप्रत्याशित वृद्धि पाई जाती है, तो उसकी स्वतः संज्ञान लेकर जांच की जाए।
दिल्ली हाईकोर्ट में दायर किरण बेदी की यह पहल यदि किसी तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचती है, तो यह देश के प्रशासनिक और राजनीतिक ढांचे में शुचिता लाने का काम करेगी। अब देखना यह होगा कि अदालत इस जनहितैषी कदम पर क्या दिशा-निर्देश जारी करती है और केंद्र सरकार देश भर में अधिकारियों और नेताओं के लिए ऐसे केंद्रीय कानून के निर्माण पर क्या रुख अपनाती है।






