विद्युत विभाग :सीएम सिटी गोरखपुर:कस्तूरबा स्कूल हादसे के बाद संग्राम! जेई के निलंबन पर एसई कार्यालय का घेराव, ‘बख्शे गए’ चेहरों ने खोला मोर्चा!

गोरखपुर 30जुलाई :पिपराइच स्थित कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय में बिजली आपूर्ति ठप होने से 9 छात्राओं के बेहोश होने और तत्पश्चात अवर अभियंता दिनेश जायसवाल के निलंबन का मामला अब तूल पकड़ता नजर आ रहा है। स्थानीय विभागीय चर्चाओं और सूत्रों के अनुसार, निलंबन की कार्रवाई से उग्र हुए जूनियर इंजीनियर संगठन के पदाधिकारियों और अवर अभियंताओं ने अधीक्षण अभियंता के.के. राठौर के कार्यालय का घेराव कर जोरदार नारेबाजी और प्रदर्शन किया।
डिस्कॉम द्वारा बख्शे गए चेहरों ने खोला मोर्चा
घटनाक्रम में सबसे चौंकाने वाला पहलू संगठन के उन चेहरों की सक्रियता को लेकर है, जिन्हें बीते दिनों पूर्वांचल डिस्कॉम प्रबंधन ने जोन से बाहर स्थानांतरित न करते हुए राहत दी थी और प्रबंधन ने नरमी बरती थी, वही अब अधीक्षण अभियंता कार्यालय के समक्ष सबसे मुखर होकर विरोध दर्ज करा रहे हैं।
प्रदर्शन के दौरान “अधीक्षण अभियंता मुर्दाबाद” और “एसई साहब शर्म करो” जैसे तीखे नारों से परिसर गूंज उठा। जेई दिनेश जायसवाल के निलंबन को ‘एकतरफा और बलि का बकरा बनाने वाली कार्रवाई’ करार देते हुए संगठन ने इसे तत्काल वापस लेने की मांग की है।
क्या था पूरा मामला?
मंगलवार को महमूदाबाद स्थित कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय में ट्रांसफार्मर फुंकने की वजह से बिजली आपूर्ति पूरी तरह ठप हो गई थी। भीषण गर्मी और उमस के कारण डिहाइड्रेशन का शिकार होकर 9 छात्राएं बेहोश हो गईं, जिन्हें आनन-फानन में सीएचसी पिपराइच भर्ती कराना पड़ा। मामले में प्रशासनिक दबाव बढ़ते ही अधीक्षण अभियंता के.के. राठौर ने ट्रांसफार्मर बदलने में लापरवाही का आरोप लगाते हुए जेई मेडिकल ग्रामीण दिनेश जायसवाल को निलंबित कर दिया था।
मुख्य अभियंता की कार्यशैली और प्रबंधन की शह पर सवाल
जेई के निलंबन के बाद जिस तरह से करीब दो दर्जन अवर अभियंताओं ने अधीक्षण अभियंता कार्यालय को घेरकर सीधे प्रशासनिक व्यवस्था को चुनौती दी है, उससे निगम के भीतर हड़कंप मच गया है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि:
क्या पूर्वांचल डिस्कॉम प्रबंधन और मुख्य अभियंता इस अनुशासनहीनता और खुलेआम नारेबाजी का संज्ञान लेते हुए सख्त दंडात्मक कार्रवाई करेंगे?
या फिर जनपद में तैनात सैकड़ों अवर अभियंताओं के बीच महज 1 दर्जन नेताओं के आगे स्थानीय प्रबंधन नतमस्तक रहेगा?
विद्युत निगम के गलियारों में चर्चा जोरों पर है कि क्या स्थानीय स्तर पर इस धरने-प्रदर्शन को भीतर से ही शह मिल रही है। फिलहाल, संगठन ने मांग न माने जाने पर पूरे जिले में कार्य बहिष्कार और बड़े आंदोलन की चेतावनी दी है, जिससे विद्युत व्यवस्था पर संकट के बादल गहरा गए हैं।






