ताज़ातरीन

हाईकोर्ट की सख्ती: दागी वकीलों की सूची न देने पर बार एसोसिएशनों की मान्यता होगी रद्द

बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश ने दिया 15 दिन का अल्टीमेटम

आपराधिक मामलों में नामजद वकीलों का ब्योरा देना अनिवार्य

आदेश न मानने पर कल्याणकारी योजनाओं के लाभ से भी होंगे वंचित

प्रयागराज 26 जुलाई :इलाहाबाद हाईकोर्ट के कड़े रुख के बाद ‘बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश’ ने प्रदेश की सभी बार एसोसिएशनों के खिलाफ सख्त कदम उठाया है। बार काउंसिल ने राज्य भर के बार एसोसिएशनों को 15 दिन का अल्टीमेटम देते हुए ऐसे वकीलों की पूरी सूची मांगी है, जिन पर गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं।

काउंसिल द्वारा जारी आदेश के अनुसार, ऐसे सभी वकीलों का ब्योरा 15 दिनों के भीतर हर हाल में सौंपना होगा जिनके खिलाफ पुलिस में एफआईआर (FIR) दर्ज है, चार्जशीट दाखिल हो चुकी है या अदालत में मामला (ट्रायल) लंबित चल रहा है।

मान्यता होगी रद्द, अवमानना की कार्रवाई संभव

बार काउंसिल ने चेतावनी जारी करते हुए स्पष्ट किया है कि तय समय सीमा (15 दिन) के भीतर जो बार एसोसिएशन यह सूची उपलब्ध कराने में विफल रहेगी, उसकी मान्यता तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दी जाएगी। इसके अतिरिक्त, ऐसी एसोसिएशनों से जुड़े वकीलों को बार काउंसिल की किसी भी कल्याणकारी योजना का लाभ नहीं दिया जाएगा। काउंसिल ने यह भी साफ किया है कि इस आदेश की अनदेखी को सीधे तौर पर ‘हाईकोर्ट की अवमानना’ माना जाएगा और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई होगी।

क्यों पड़ा सख्त आदेश का दबाव?

अदालती परिसरों में अनुशासन बनाए रखने और वकालत के पेशे की गरिमा को आपराधिक छवि वाले तत्वों से बचाने के उद्देश्य से हाईकोर्ट ने यह कड़ा रुख अपनाया है। प्रदेश भर की बार एसोसिएशनों में हड़कंप मच गया है और अब उन्हें तय समयावधि में अपने स्तर पर छानबीन कर रिपोर्ट तैयार करनी होगी।

Prabandh Sampadak chandrashekhar Singh

Prabhand Sampadak Of Upbhokta ki Aawaj.

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button