CM सिटी में विद्युत महकमे का अंधेरराज: 33KV मुंडेरा बाजार, 13 पोल सहजनवा की अवैध लाइन के बाद अब 33KV एयरफोर्स के 700 मीटर तार पार! भ्रष्टचेहरों को प्रबंधन का खुला संरक्षण??

गोरखपुर 06 जून :मुख्यमंत्री का गृह जनपद होने के बावजूद गोरखपुर में पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड के कुछ अधिकारियों और इंजीनियरों ने विभाग को अपनी जागीर बना लिया है। एक के बाद एक सामने आ रहे बड़े घोटालों और चोरियों पर प्रबंधन की “रहस्यमयी चुप्पी” और सुस्त रवैये ने अब कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आलम यह है कि लाखों के राजस्व का चूना लगने और सीधे मुख्यमंत्री की साख दांव पर होने के बाद भी जांच टीमें पंगु बनी हुई हैं और आरोपी बेखौफ होकर नई वारदातों को अंजाम दे रहे हैं।
मुंडेरा बाजार 33KV लाइन चोरी: जांच टीम असहाय, आरोपी बुलंद!
चौरी-चौरा खंड के अंतर्गत आने वाले 33KV मुंडेरा बाजार लाइन चोरी मामले ने विभाग को लाखों रुपये की चपत लगाई थी। इस हाई-प्रोफाइल मामले में बिजली विभाग के ही भीतर के ‘भेदियों’ के शामिल होने की आशंका जताई गई थी। लेकिन हैरान करने वाली बात यह है कि हफ्तों बीत जाने के बाद भी जांच टीम किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंच सकी है।
सूत्रों का दावा:
प्रबंधन की घोर लापरवाही और ढुलमुल रवैये के कारण जांच फाइलें ठंडे बस्ते में डाल दी गई हैं। जांच टीम पूरी तरह असहाय नजर आ रही है और अब तक एक भी दोषी कर्मचारी या अधिकारी पर कोई निलंबन या अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं की गई है।
सहजनवां खंड: 13 पोल की अवैध लाइन और ‘बड़े लेनदेन’ का खेल!
भ्रष्टाचार की जड़ें सिर्फ चौरी-चौरा तक ही सीमित नहीं हैं। सहजनवां खंड के सेवई बाजार में बिना किसी आधिकारिक मंजूरी के 13 पोल की पूरी अवैध लाइन खींच दी गई। इस मामले के उजागर होने के बाद विभाग में हड़कंप मचना चाहिए था, लेकिन इसके उलट अंदरखाने “बड़े लेनदेन” और मोटी रकम की बंदरबांट की चर्चाएं जोरों पर हैं। इस खेल में सीधे तौर पर संबंधित जूनियर इंजीनियर और सब-डिवीजनल ऑफिसर की भूमिका संदिग्ध मानी जा रही है, लेकिन रसूख और सांठगांठ के दम पर जांच फाइल को दबाकर रख दिया गया है।
नया मामला: एयरफोर्स 33KV लाइन से 700 मीटर तार पार, हड़कंप!
इन दोनों मामलों में प्रबंधन के शिथिल और संदेहास्पद रवैये का नतीजा यह हुआ कि चोरों और भ्रष्ट तत्वों के हौसले सातवें आसमान पर पहुंच गए। अब एक और नए सनसनीखेज मामले ने पूरे महकमे में हड़कंप मचा दिया है।
इसी चौरी-चौरा खंड के अंतर्गत एयरफोर्स की 33KV लाइन का लगभग 700 मीटर लंबा कीमती एल्युमिनियम का तार चोरों ने काट लिया और रफूचक्कर हो गए। संवेदनशील क्षेत्र की लाइन से इतनी बड़ी मात्रा में तार चोरी होना बिना किसी विभागीय मिलीभगत के मुमकिन नहीं है। इस मामले में अवर अभियंता रणविजय बिंद ने थाने में तहरीर तो दे दी है, लेकिन हमेशा की तरह किसी भी विभागीय अधिकारी या लाइन स्टाफ पर उंगली उठाने से परहेज किया जा रहा है।
आरोपों के घेरे में JE : आखिर किसका हाथ है सिर पर?
गोरखपुर के बिजली गलियारों में यह चर्चा आम हो चुकी है कि किसी भी विभागीय व्यक्ति पर कार्रवाई न करना अब यहाँ की नई परंपरा” बन चुकी है।
इस पूरी कमान के केंद्र में मौजूद अवर अभियंता रणविजय बिंद पर पहले भी कई गंभीर आरोप लग चुके हैं।
उपभोक्ताओं से दुर्व्यवहार, अवैध वसूली, और संगठित भ्रष्टाचार के कई मामलों में उनका नाम सामने आ चुका है।
इतने दागदार रिकॉर्ड और लगातार हो रही चोरियों के बावजूद, डिस्काम प्रबंधन का उनके प्रति नरम रुख यह साफ इशारा करता है कि उन्हें किसी “बड़े मगरमच्छ” का वरदहस्त प्राप्त है।
जीरो टॉलरेंस’ को ठेंगा दिखाता पूर्वांचल डिस्काम
उत्तर प्रदेश सरकार लगातार भ्रष्टाचार पर ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति का ढिंढोरा पीट रही है, लेकिन सीएम सिटी गोरखपुर में ही अधिकारी इस नीति को ठेंगा दिखा रहे हैं। मुंडेरा बाजार से लेकर एयरफोर्स लाइन तक की चोरियां और सेवाई बाजार का अवैध लाइन घोटाला चीख-चीख कर कह रहा है कि बिजली विभाग में ‘ऊपर से नीचे तक’ सब गोलमाल है।
अगर समय रहते डिस्कॉम के शीर्ष प्रबंधन और शासन ने इन फाइलों को खोलने और दागी इंजीनियरों पर हंटर चलाने का काम नहीं किया, तो गोरखपुर विद्युत महकमा पूरी तरह कंगाल होने की कगार पर पहुंच जाएगा। उपभोक्ताओं की जेब काटने वाले चेहरों का बेनकाब होना अब बेहद जरूरी है।
‘जीरो टॉलरेंस’ को ठेंगा दिखाता पूर्वांचल डिस्काम: शीर्ष नेतृत्व पर टिकी निगाहें
उत्तर प्रदेश सरकार लगातार भ्रष्टाचार पर ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति का दावा कर रही है, लेकिन सीएम सिटी गोरखपुर में ही PuVVNL के अधिकारी इस नीति को ठेंगा दिखा रहे हैं। मुंडेरा बाजार से लेकर एयरफोर्स लाइन तक की चोरियां और सेवई बाजार का अवैध लाइन घोटाला चीख-चीख कर कह रहा है कि बिजली विभाग में ‘ऊपर से नीचे तक’ सब गोलमाल है।
गोरखपुर विद्युत महकमे में संस्थागत रूप ले चुके इस अंधेरराज और दागियों को मिल रहे खुले संरक्षण के बाद अब सीधे सूबे के ऊर्जा मंत्री ए.के. शर्मा और अपर मुख्य सचिव (ऊर्जा) एवं अध्यक्ष पावर कॉरपोरेशन आशीष गोयल पर निगाहें टिकी हैं। बिजली जगत और आम जनता की नजरें अब इस बात पर हैं कि क्या लखनऊ में बैठा यह शीर्ष नेतृत्व सीएम सिटी के इस महाघोटाले का संज्ञान लेकर दागी इंजीनियरों और लापरवाह प्रबंधन पर सीधे हंटर चलाएगा, या फिर स्थानीय स्तर पर फाइलों को दबाने का यह खेल यूं ही जारी रहेगा?
पड़ताल जारी






