गोरखपुर कस्तूरबा स्कूल हादसा: खास मेहरबानी’ से बची वर्कशॉप JE की कुर्सी?

क्षेत्रीय JE बना बलि का बकरा?
वर्कशॉप EE के ‘पुराने याराने’ की भेंट चढ़ा सिस्टम?
ऑडिट में खुलेगी ट्रांसफार्मर घपलेबाज़ी की पोल?
मुख्य अभियंता की चुप्पी पर उठे सवाल, क्या पूर्वांचल प्रबंधन तय करेगा उच्च अधिकारियों की जवाबदेही?
गोरखपुर, 01अगस्त :मुख्यमंत्री के गृह जनपद गोरखपुर स्थित कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय में बिजली आपूर्ति ठप होने से आधा दर्जन छात्राओं के गर्मी से बेहोश होने की घटना ने विद्युत विभाग के स्थानीय अधिकारियों की कार्यशैली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा कर दिया है। शासन-प्रशासन की थू-थू से बचने के लिए प्रारंभिक स्तर पर क्षेत्रीय अवर अभियंता को तो निलंबित कर दिया गया, लेकिन ‘उपभोक्ता की आवाज’ की पड़ताल में मामला केवल एक क्षेत्रीय JE की लापरवाही तक सीमित नजर नहीं आ रहा है।
ग्राउंड रिपोर्ट: 2 घंटे में दी गई थी सूचना, फिर भी नहीं मिला ट्रांसफार्मर
‘उपभोक्ता की आवाज़’ की पड़ताल में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। घटना के दिन कस्तूरबा स्कूल का ट्रांसफार्मर फुंकने की सूचना स्थानीय अवर अभियंता द्वारा घटना के दो घंटे के भीतर ही विद्युत कार्यशाला खंड (वर्कशॉप) को दे दी गई थी। इसके बावजूद वर्कशॉप से समय पर नया या मरम्मत किया हुआ ट्रांसफार्मर उपलब्ध नहीं कराया गया। नतीजतन, कई घंटों तक बिजली आपूर्ति बहाल नहीं हो सकी और उमस भरी गर्मी में मासूम बच्चियों की तबीयत बिगड़ गई, जिन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।
राप्तीनगर का ‘पुराना याराना’ और वर्कशॉप JE को बचाने की ‘सेटिंग’
मामले में सबसे बड़ा मोड़ वर्कशॉप JE और अधिशासी अभियंता की संदिग्ध सांठगांठ के उजागर होने से आया है। विभागीय सूत्रों के मुताबिक, वर्कशॉप में तैनात JE पूर्व में अधिशासी अभियंता कार्यशाला के साथ ही राप्तीनगर में तैनात रह चुके हैं।
बताया जा रहा है कि इसी पुराने जुड़ाव और अधिशासी अभियंता की खास सिफारिश के बल पर JE को वर्कशॉप में ‘विशेष तैनाती’ दिलवाई गई थी। यही वजह है कि कस्तूरबा स्कूल हादसे में वर्कशॉप स्तर पर हुई इतनी बड़ी लापरवाही के बावजूद वर्कशॉप JE और EE को बचाने का खेल खेला जा रहा है।
ऑडिट हुआ तो खुलेगी ट्रांसफार्मर इश्यू में घपलेबाजी की पोल
विद्युत विभाग के अंदरूनी सूत्रों का दावा है कि यदि कार्यशाला खंड के दैनिक रजिस्टर और स्टॉक इश्यू का निष्पक्ष ऑडिट कराया जाए, तो ट्रांसफार्मर जारी करने में की जा रही गंभीर अनियमितताओं और भ्रष्टाचार का बड़ा खुलासा होगा। चहेतों को बचाने और कागजी हेरफेर को छुपाने के लिए ही इस पूरे मामले में चुप्पी साधी गई है।
कार्यशाला खंड में लंबे समय से जमे अधिशासी अभियंता और उनके पसंदीदा कर्मचारियों की यह कार्यप्रणाली सीधे तौर पर मासूम बच्चियों के जीवन को खतरे में डालने के लिए जिम्मेदार है।
केवल एक JE पर गाज गिराकर ‘इतिश्री’ क्यों?
आश्चर्य की बात यह है कि ट्रांसफार्मर न मिलने की पूरी सच्चाई और अंदरूनी सांठगांठ सामने होने के बावजूद मुख्य अभियंता गोरखपुर द्वारा विद्युत कार्यशाला खंड के अधिकारियों के खिलाफ अब तक कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की गई है। उच्च अधिकारियों की इस चुप्पी को विभागीय गलियारों में भ्रष्टाचार और लीपापोती के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।
प्रदेश के मुखिया के अपने शहर में एक ट्रांसफार्मर के समय पर न बदलने के कारण मासूम बच्चे अस्पताल पहुँच जाएँ, यह विद्युत प्रबंधन की गंभीर नाकामी को दर्शाता है। विभागीय कर्मचारियों में भी इस बात को लेकर तीव्र आक्रोश है कि असली गुनहगारों को बचाकर केवल क्षेत्रीय JE को बलि का बकरा बनाया गया है।
अब देखना यह है कि क्या पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम का शीर्ष प्रबंधन इस मामले में सख्ती से संज्ञान लेते हुए कार्यशाला के EE, चहेते JE और अन्य जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करेगा या ट्रांसफार्मर इश्यू के इस पूरे खेल को ठंडे बस्ते में ही दबा दिया जाएगा।
भ्र्ष्टाचार और भ्र्ष्टाचारियो के विरुद्ध युद्ध अभी है।






