वाराणसी में अब जीपीएस इंजेक्शन से थमेगी छुट्टा पशुओं की राह, दिसंबर से लागू होगी व्यवस्था

वाराणसी30अक्टूबर :काशी की सड़कों और गलियों में छुट्टा पशुओं और लावारिस श्वानों के कारण बन रही जाम व दुर्घटना की स्थिति पर लगाम कसने के लिए नगर निगम एक हाई-टेक पहल करने जा रहा है। अब शहर में घूम रहे छुट्टा पशुओं की सटीक लोकेशन और पहचान दर्ज करने के लिए ‘इंजेक्टेबल जीपीएस’ (Injectable GPS) तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा।
दिसंबर तक लागू करने की तैयारी
नगर निगम प्रशासन के अनुसार, इस आधुनिक तकनीक को आगामी दिसंबर माह तक पूरे शहर में प्रभावी रूप से लागू करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लागू होने के बाद नगर निगम के पास शहर के आवारा पशुओं की पल-पल की डिजिटल ट्रैकिंग होगी।
टीकाकरण और पशु बंधी अभियान के दौरान लगेगा इंजेक्शन
इस व्यवस्था के क्रियान्वयन के लिए विशेष योजना बनाई गई है। नगर निगम द्वारा चलाए जाने वाले पशु बंधी अभियान और नियमित टीकाकरण कार्यक्रमों के दौरान गाय, भैंस और श्वानों (कुत्तों) के शरीर में एक विशेष प्रकार की जीपीएस-सक्षम माइक्रोचिप/इंजेक्शन लगाई जाएगी।
तकनीक के प्रमुख फायदे
सटीक ट्रैकिंग: जीपीएस तकनीक से पशुओं की वर्तमान लोकेशन और आवाजाही पर डिजिटल निगरानी रखी जा सकेगी।
पशुपालकों की पहचान: बार-बार सड़क पर पशु छोड़ने वाले मालिकों को चिन्हित कर उन पर दंडात्मक कार्रवाई करना आसान होगा।
दुर्घटनाओं में कमी: मुख्य मार्गों और संवेदनशील इलाकों से पशुओं को समय रहते कांजी हाउस या आश्रय स्थलों तक पहुंचाया जा सकेगा।
नगर निगम अधिकारियों का मानना है कि इस कदम से न केवल वाराणसी की सड़कों को सुगम और सुरक्षित बनाया जा सकेगा, बल्कि धार्मिक व पर्यटन दृष्टि से महत्वपूर्ण इस शहर की छवि में भी सुधार होगा।





