सरकारी स्कूल की बदहाली उजागर करने वाले पत्रकार की FIR पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने लगाई रोक

अदालत की सख्त टिप्पणी: “कमियों को उजागर करने वाले पत्रकार के खिलाफ कार्रवाई ‘किलिंग द मैसेंजर’ जैसी”
अपर मुख्य सचिव को निर्देश: स्कूल की मौजूदा स्थिति और तस्वीरों के साथ व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करें
लखनऊ 11सितंबर : इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने सरकारी स्कूल में अव्यवस्थाओं की पोल खोलने वाले एक पत्रकार को राहत देते हुए उसके खिलाफ दर्ज एफआईआर (FIR) की कार्रवाई पर रोक लगा दी है। मामले की सुनवाई करते हुए अदालत ने कड़ी टिप्पणी की कि कमियों को सामने लाने वाले पत्रकार पर कार्रवाई करना ‘किलिंग द मैसेंजर’ (संदेश वाहक को ही मार देने) जैसा है। कोर्ट ने प्रथम दृष्टया इस पूरी कार्रवाई को बदले की भावना से प्रेरित माना है।
यह आदेश न्यायमूर्ति अब्दुल मोईन और न्यायमूर्ति प्रमोद कुमार श्रीवास्तव की पीठ ने पत्रकार अमित यादव द्वारा दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया।
क्या है पूरा मामला?
पत्रकार अमित यादव अपने पेशेवर दायित्व के तहत गोसाईंगंज स्थित पूर्व माध्यमिक विद्यालय, बेगरिया मऊ गए थे। वहां उन्होंने देखा कि स्कूल के शौचालय पूरी तरह बदहाल थे और छात्रों के लिए पीने के पानी तक की उचित व्यवस्था नहीं थी। अमित यादव ने इस मुद्दे पर कुछ स्थानीय शिक्षकों के इंटरव्यू लिए और एक रिपोर्ट तैयार की थी।
रिपोर्टिंग के 4 दिन बाद दर्ज हुई FIR
अदालत को सुनवाई के दौरान बताया गया कि इस रिपोर्टिंग के ठीक चार दिन बाद, 24 अगस्त को गोसाईंगंज थाने में अमित यादव के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 223, 353 और 356 के तहत मामला दर्ज कर लिया गया।
कोर्ट का कड़ा रुख और निर्देश
मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने एफआईआर के आधार पर आगे की किसी भी दंडात्मक कार्रवाई पर रोक लगा दी है। इसके साथ ही, अदालत ने बेसिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव को एक व्यक्तिगत शपथ पत्र दाखिल करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने विभाग से संबंधित स्कूल की मौजूदा स्थिति और स्कूल परिसर की अद्यतन तस्वीरें भी पेश करने के आदेश दिए हैं।






