आरबीआई का बड़ा पायलट प्रोजेक्ट: जल्द बाजार में आ सकते हैं 10 और 20 रुपये के प्लास्टिक (पॉलिमर) नोट

नई दिल्ली 28 जुलाई : देश में जल्द ही 10 और 20 रुपये के नए प्लास्टिक (पॉलिमर) नोट आपकी जेब में नजर आ सकते हैं। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव को केंद्र सरकार ने अपनी मंजूरी दे दी है। इस योजना के तहत देश के अलग-अलग हिस्सों में प्रयोग (ट्रायल) के तौर पर 10 और 20 रुपये के 100-100 करोड़ पॉलिमर नोट जारी किए जाएंगे। यदि यह पायलट प्रोजेक्ट सफल रहा, तभी इन्हें बड़े पैमाने पर देश भर में लागू करने पर अंतिम फैसला लिया जाएगा।
संसद में सरकार का बयान
लोकसभा में एक लिखित सवाल का जवाब देते हुए वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने बताया कि वित्त मंत्रालय ने आरबीआई के इस ट्रायल प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह पूरी तरह से एक पायलट प्रोजेक्ट है। इसका मुख्य उद्देश्य यह जांचना है कि भारत की विविध जलवायु और रोजमर्रा के इस्तेमाल के माहौल में प्लास्टिक नोट कितने टिकाऊ और व्यावहारिक साबित होते हैं।
कागज के नोटों की तुलना में अधिक टिकाऊ
भारतीय रिजर्व बैंक का मानना है कि पॉलिमर नोट पारंपरिक कागजी नोटों की तुलना में बहुत अधिक मजबूत होते हैं और लंबे समय तक चलते हैं। ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन और कनाडा समेत दुनिया के कई देशों में पॉलिमर नोटों का इस्तेमाल काफी समय से हो रहा है, जहां इनके शानदार परिणाम देखने को मिले हैं। इसी सफलता को ध्यान में रखते हुए भारत भी इस आधुनिक तकनीक को अपने यहां आजमाना चाहता है।
कागजी नोट बंद नहीं होंगे: सरकार की सफाई
प्लास्टिक नोट आने की खबर के साथ फैल रही अफवाहों पर विराम लगाते हुए सरकार ने साफ किया है कि मौजूदा कागजी नोटों को बंद नहीं किया जाएगा।
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नए पॉलिमर नोट आने के बाद भी पुराने नोट पूरी तरह से मान्य रहेंगे।
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ट्रायल सफल होने की स्थिति में भी प्लास्टिक और कागज—दोनों तरह के नोट बाजार में एक साथ चलन में बने रहेंगे।
डिजिटल पेमेंट और छपाई लागत पर असर
सरकार का कहना है कि प्लास्टिक नोटों से डिजिटल लेनदेन पर कोई नकारात्मक असर पड़ेगा या नहीं, यह कहना अभी जल्दबाजी होगी। आरबीआई के अनुसार कैश और डिजिटल पेमेंट (UPI, कार्ड्स) एक-दूसरे के पूरक हैं और दोनों का अपना महत्व बना रहेगा।
हालांकि, अगर यह प्रयोग सफल होता है तो लंबी अवधि में देश को बड़ा आर्थिक फायदा हो सकता है। प्लास्टिक नोट गंदे होकर जल्दी खराब नहीं होते, जिससे बार-बार नए नोट छापने की जरूरत कम पड़ेगी और नोट छपाई की भारी-भरकम लागत में बड़ी कटौती संभव होगी।
फिलहाल, पूरा देश आरबीआई के इस जमीनी ट्रायल के नतीजों का इंतजार कर रहा है।






