ऐतिहासिक फैसला: रिचार्ज के बाद भी बिजली गुल रहने पर पावर कॉर्पोरेशन पर लगा ₹7.18 लाख का जुर्माना

लखनऊ 07जून :उत्तर प्रदेश के करोड़ों बिजली उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा में राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद की एक बड़ी और ऐतिहासिक जीत हुई है। उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा की याचिका पर सुनवाई करते हुए उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग (UPERC) ने एक अभूतपूर्व फैसला सुनाया है। स्मार्ट प्रीपेड मीटर रिचार्ज होने के तय समय (2 घंटे) के भीतर बिजली बहाल न करने के मामले में आयोग ने कड़ा रुख अपनाते हुए उत्तर प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (UPPCL) पर ₹7,18,000 (सात लाख अट्ठारह हजार रुपये) का भारी-भरकम जुर्माना ठोंक दिया है। इसे देश में इस तरह का अब तक का सबसे बड़ा जुर्माना माना जा रहा है।
15 दिन के भीतर जमा करनी होगी पेनल्टी
नियामक आयोग द्वारा जारी आधिकारिक आदेश के अनुसार, UPPCL को यह जुर्माना राशि आदेश जारी होने के 15 दिनों के भीतर आयोग के पास जमा करानी होगी। आयोग ने स्पष्ट किया है कि बिजली अधिनियम, 2003 की धारा 142 और धारा 57 के तहत दी गई शक्तियों का उपयोग करते हुए यह कार्रवाई की गई है।
क्यों लगा इतना बड़ा जुर्माना
आदेश के मुताबिक, मार्च और अप्रैल 2026 के दौरान UPPCL ‘स्टैंडर्ड्स ऑफ परफॉर्मेंस’ (Standards of Performance) नियमों का पालन करने में बार-बार विफल रहा। नियामक आयोग ने प्रति उल्लंघन ₹1,00,000 और विफलता जारी रहने पर ₹6,000 प्रति दिन की अतिरिक्त पेनल्टी लगाई है। जुर्माने का ब्रेकअप इस प्रकार है:
आयोग की कड़ी फटकार: “लापरवाह रवैया बर्दाश्त नहीं”
नियामक आयोग के सदस्य संजय कुमार सिंह और अध्यक्ष अरविंद कुमार द्वारा हस्ताक्षरित इस आदेश में पावर कॉर्पोरेशन की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं।
तदर्थ दृष्टिकोण की आलोचना:
आयोग ने पाया कि बीच-बीच में बिजली आपूर्ति और तकनीकी सिस्टम में थोड़ा सुधार तो हुआ, लेकिन अगले ही दिन स्थिति फिर बिगड़ गई। इससे साफ है कि UPPCL मुख्य तकनीकी खामी को दूर करने के बजाय केवल कामचलाऊ तरीके अपना रहा था।
व्यावसायिक संगठन के लिए अशोभनीय:
आयोग ने सख्त शब्दों में कहा कि UPPCL जैसी बड़ी व्यावसायिक संस्था, जिसका राज्य के उपभोक्ताओं से सीधा और निरंतर जुड़ाव है, उसका ऐसा लापरवाह रवैया पूरी तरह से अवांछनीय है।
रूट कॉज एनालिसिस के निर्देश:
आयोग ने आगे आदेश दिया है कि UPPCL तुरंत इस तकनीकी खराबी का गहराई से विश्लेषण करे, ताकि भविष्य में उपभोक्ताओं को रिचार्ज के बाद इस तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।
उपभोक्ताओं के लिए बड़ी राहत
अवधेश वर्मा की इस कानूनी लड़ाई और आयोग के इस ऐतिहासिक फैसले से साफ हो गया है कि यदि स्मार्ट प्रीपेड मीटर रिचार्ज करने के बाद भी तय समय सीमा के भीतर उपभोक्ता की बिजली नहीं जुड़ती है, तो उसके लिए पूरी तरह से बिजली कंपनियां जिम्मेदार होंगी। उपभोक्ताओं को उम्मीद है कि इस भारी जुर्माने के बाद अब पावर कॉर्पोरेशन अपनी व्यवस्थाओं को दुरुस्त करेगा।






