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गोरखपुर विद्युत महकमे में भूचाल: पोल शिफ्टिंग के कथित भ्रष्टाचार पर जांच कमेटी ने कसी कमर, रिपोर्ट पर टिकी सबकी निगाहें

गोरखपुर 03अक्टूबर : पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड के अंतर्गत नगरीय विद्युत वितरण खंड-प्रथम टाउनहॉल के बेतियाहाता क्षेत्र में बिजली विभाग के अवर अभियंता अमित सहगल और लाइनमैन की संलिप्तता का एक और काला चिट्ठा खुलकर सामने आया है। लगातार छपी खबरों ने पूरे विद्युत महकमे में हड़कंप मचा दिया है। इस हाई-प्रोफाइल मामले में पोल शिफ्टिंग के नाम पर अवैध वसूली, नियमों को ताक पर रखकर बिना एस्टीमेट पोल उखाड़ने और उपभोक्ताओं के उत्पीड़न के गंभीर खुलासे हुए हैं।

क्या है पूरा घटनाक्रम?

बेतियाहाता में हरिहर प्रसाद दुबे मार्ग पर सूर्य विहार कॉलोनी के सामने गली में दवा व्यवसायी अवनीश गुप्ता अपने मकान का निर्माण करा रहे थे। उनके मकान के सामने बिजली का एक पोल लगा हुआ था, जिसके तार काफी नीचे लटक रहे थे। निर्माण कार्य के दौरान किसी भी बड़े हादसे या करंट लगने के खतरे से बचने के लिए पीड़ित उपभोक्ता अवनीश गुप्ता ने टाउनहॉल खंड के अधिशासी अभियंता को आधिकारिक प्रार्थना पत्र सौंपा।

यह आवेदन एसडीओ के माध्यम से आगे बढ़ते हुए संबंधित अवर अभियंता अमित सहगल के पास पहुंचा। आरोप है कि जहां नियमानुसार विधिवत एस्टीमेट बनाकर कार्य किया जाना चाहिए था, वहीं जेई और लाइनमैन ने विभागीय प्रक्रिया को ताक पर रख दिया।

अवैध वसूली, गायब पोल और जानलेवा लापरवाही

शिकायतकर्ता के अनुसार, जेई ने पोल और तार हटाने का आधिकारिक एस्टीमेट एक से डेढ़ लाख रुपये तक का बताया। जब उपभोक्ता ने खर्च कम करने की बात कही, तो कथित तौर पर जेई ने खेल खेलते हुए 20 से 30 हजार रुपये लेकर बिना किसी वैध एस्टीमेट के काम कराने की बात तय की।

रुपये लेने का गंभीर आरोप:

अवनीश गुप्ता का आरोप है कि उन्होंने जेई को 20 हजार रुपये दिए। इसके बाद जेई के इशारे पर मौके से पोल उखाड़कर बगल की एक गली में रखवा दिया गया और छत पर लोहे का एंगल लगवाकर नीचे लटक रहे तारों को उससे जोड़ दिया गया। यह स्थिति न केवल तकनीकी रूप से अवैध थी, बल्कि आम नागरिकों के जीवन के लिए एक खुला खतरा भी बन गई।

दबाव बनाने के लिए पुलिसिया पैंतरा और डीजीपी कार्यालय तक गूंज

जब इस मनमानी और अवैध तरीके से पोल हटाने का विरोध शुरू हुआ और मामला तूल पकड़ने लगा, तो अपनी खाल बचाने के लिए जेई अमित सहगल ने उल्टा उपभोक्ता अवनीश गुप्ता के खिलाफ ही कैंट थाने में तहरीर दे डाली। जेई ने आरोप मढ़ा कि उपभोक्ता ने खुद ही पोल और तार शिफ्ट करा दिए हैं।

हालांकि, मामले की गंभीरता को देखते हुए जब पुलिस जांच हुई और मौके पर पोल व पुख्ता साक्ष्य सामने आए, तो सच बेनकाब हो गया। इसके बाद पीड़ित उपभोक्ता ने भी कैंट थाने में लिखित तहरीर देकर जेई के खिलाफ अवैध रूप से रुपये वसूलने और जबरन उत्पीड़न का गंभीर आरोप जड़ दिया। इस मामले की आंच इतनी तेज हो गई कि डीजीपी कार्यालय से भी इस संबंध में पूछताछ की जा चुकी है।

जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका पर भी उठे गंभीर सवाल!

इस पूरे प्रकरण में सबसे बड़ा और चुभता हुआ सवाल यह उठ रहा है कि जब पीड़ित उपभोक्ता ने पोल हटाने का पहला आधिकारिक आवेदन अधिशासी अभियंता को सौंपा था, तो वह आवेदन जेई तक पहुंचते-पहुंचते ‘अवैध शिफ्टिंग और वसूली’ के खेल में कैसे बदल गया?

चूंकि ऐसे मामलों में एक्सईएन और एसडीओ स्तर पर कड़ी मॉनिटरिंग होती है, इसलिए विभागीय गलियारों में इस बात की चर्चा जोरों पर है कि आखिर एक्सईएन और एसडीओ स्तर पर इतनी सुस्ती या कथित मिलीभगत क्यों बरती गई?

बरहाल, तत्कालीन अधिशासी अभियंता पंकज कुमार और संबंधित अधिकारियों की इस पूरे प्रकरण में वास्तविक भूमिका क्या रही है, यह तो जांच रिपोर्ट आने के बाद ही पूरी तरह साफ हो सकेगा।

सख्त एक्शन: मुख्य अभियंता के निर्देश पर द्वय-सदस्यीय जांच कमेटी गठित, 3 दिन में रिपोर्ट तलब

मामले की नजाकत और मीडिया में उजागर हुई शिकायतों को बेहद संवेदनशीलता से लेते हुए मुख्य अभियंता लोकेंद्र बहादुर सिंह के निर्देश पर जांच प्रक्रिया काफी तेज कर दी गई है। इसके बाद अधीक्षण अभियंता (शहर) रंजीत चौधरी ने कड़ा रुख अपनाते हुए मामले की निष्पक्ष जांच के लिए एक उच्चस्तरीय द्वय-सदस्यीय जांच समिति का गठन कर दिया है:

1. अध्यक्ष: चंद्रेश उपाध्याय, अधिशासी अभियंता, नगरीय विद्युत वितरण खंड-तृतीय, मोहद्दीपुर।

2. सदस्य:रंजना कन्नौजिया, सहायक अभियंता (मीटर), विद्युत नगरीय परीक्षण उपखंड-प्रथम।

यह जांच समिति इस सनसनीखेज प्रकरण की परत-दर-परत विस्तृत जांच करेगी और यह पता लगाएगी कि बिना एस्टीमेट के पोल कैसे हटा और इसके पीछे किन-किन की मिलीभगत थी। समिति दोषी पाए जाने वाले भ्रष्ट कर्मचारियों के खिलाफ अपना स्पष्ट अभिमत देते हुए महज 3 कार्यदिवस के भीतर अपनी रिपोर्ट सीधे उच्चाधिकारियों को सौंपेगी।

इस ताबड़तोड़ प्रशासनिक कार्रवाई और मुख्य अभियंता स्तर से हुई सख्ती के बाद बिजली विभाग के अन्य भ्रष्ट कर्मियों और दलालों में हड़कंप मच गया है। साथ ही, जेई अमित सहगल के पास पहले टाउनहॉल उपकेंद्र और बाद में रानीबाग उपकेंद्र की दोहरी जिम्मेदारियों को लेकर भी महकमे में तरह-तरह की चर्चाएं गर्म हैं।

Prabandh Sampadak chandrashekhar Singh

Prabhand Sampadak Of Upbhokta ki Aawaj.

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