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बिजली विभाग में 6.29 करोड़ का महाघोटाला: सिद्धार्थनगर SE और बस्ती CE पर मामले को ‘मैनेज’ करने का सनसनीखेज खेल, जांच बढ़ी तो 50 करोड़ तक पहुंचेगा भ्रष्टाचार!

 

बस्ती / सिद्धार्थनगर 03अक्टूबर :पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड के अंतर्गत बिजली विभाग में भ्रष्टाचार का एक ऐसा काला अध्याय सामने आया है, जिसने महकमे की चूलें हिला कर रख दी हैं। सूत्रों के हवाले से मिल रही बेहद विश्वसनीय और सनसनीखेज जानकारी के अनुसार, सिद्धार्थनगर विद्युत वितरण खंड (द्वितीय) के अंतर्गत 379 फोर्स पी०डी० उपभोक्ताओं के मामलों में 6.29 करोड़ रुपये से अधिक की भारी-भरकम धनराशि के खेल का पर्दाफाश हुआ है। स्थिति इतनी गंभीर है कि बिना किसी उचित प्रशासनिक घोषणा, जिला प्रशासन की संस्तुति या सक्षम समिति के अनुमोदन के ही उपभोक्ताओं के बकाये को कागजों पर ‘नॉट ट्रेसेबल’ और फर्जी डुप्लीकेट संयोजन दिखा कर रातों-रात write off कर दिया गया।

हद तो तब हो गई जब कागजों पर मृत या गायब बताए गए Koeel Central Academy (खाता संख्या: 7438145000) जैसे बड़े संस्थानों पर 88.58 लाख रुपये का बकाया कागजों में गोल कर दिया गया, जबकि धरातल पर वही स्कूल और संयोजन पूरी तरह चालू हालत में संचालित मिले।

एलएमवी-1 (ग्रामीण व शहरी घरेलू), एलएमवी-2 (व्यासायिक) से लेकर एलएमवी-4 (संस्थान/स्कूल) तक की श्रेणियों में फैले इस सुनियोजित फर्जीवाड़े ने सरकारी राजस्व को सीधे तौर पर भारी क्षति पहुंचाई है।

​जैसे-जैसे इस फाइल की परतें उघड़ रही हैं, विभागीय गलियारों में खलबली मच गई है और विभागीय गलियारों में इन दिनों इस बात की सबसे तीखी चर्चा है कि सिद्धार्थनगर के SE और बस्ती के मुख्य अभियंता इस पूरे प्रकरण को दबाने और अपने स्तर पर जांच कमेटी को ‘मैनेज’ करने के लिए पुरजोर कोशिशों में जुटे हुए हैं। उच्चाधिकारियों की कथित छत्रछाया के बिना इतनी बड़ी वित्तीय अनियमितता और फाइलों के गायब होने का खेल होना असंभव माना जा रहा है।

हालांकि, विभागीय गलियारों में इन दिनों चर्चा है कि यह तो महज एक बानगी भर है; यदि इस पूरी जांच का दायरा निष्पक्षता के साथ बढ़ाया गया और बस्ती व सिद्धार्थनगर जनपद के अन्य खंडों की तरफ रुख किया गया, तो यह मामला केवल कुछ करोड़ तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे जनपद में 50 करोड़ रुपये से अधिक का महाघोटाला साबित होने की चर्चा जोरों पर है।

अब देखना यह है कि शासन स्तर पर इस सनसनीखेज रिपोर्ट के सामने आने के बाद क्या कोई सख्त उच्च-स्तरीय जांच दल गठित होता है या इन रसूखदार अधिकारियों की संलिप्तता पर पर्दा डाल दिया जाता है।

अनियमितताओं के मुख्य तरीके:

​Not Traceable प्रकरण (~150+ उपभोक्ता): बिना किसी प्रशासनिक सत्यापन और सक्षम समिति की अनुमति के उपभोक्ताओं को अनुपस्थित बताकर बकाये को अवैध रूप से समाप्त किया गया।

​डुप्लीकेट संयोजन प्रकरण (~120+ उपभोक्ता): एक ही परिसर पर दो कनेक्शन दर्शाकर पुरानी देनदारियों (जैसे ₹94,711 से लेकर ₹4,08,590 तक) को बिना SIR/M-5 रिपोर्ट के गायब कर दिया गया।

​पत्रावली गायब होना (~80+ उपभोक्ता): उपखंड कार्यालयों द्वारा विच्छेदन से जुड़े मूल अभिलेख या तो पेश ही नहीं किए गए या फिर आधी-अधूरी रिपोर्ट लगाई गई।

अधिकारियों की कार्यशैली पर खड़े होते सवाल:

​एक तरफ जहाँ उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन लिमिटेड के अध्यक्ष और पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड के प्रबंध निदेशक द्वारा भ्रष्टाचार और अनियमितताओं पर जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाते हुए कड़ी कार्रवाई और सख्त निर्देश जारी किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर धरातल पर स्थिति इसके बिल्कुल विपरीत है।

उच्चाधिकारियों के इन कड़े और स्पष्ट निर्देशों को ठेंगा दिखाते हुए आरोपी अभियंता पिछले डेढ़ महीने से पूरी तरह निडर होकर अपने पुराने तौर-तरीकों से इस अवैध खेल को अंजाम देने में जुटे हुए हैं। विभागीय आदेशों की यह खुली अवहेलना यह साफ जाहिर करती है कि इन भ्रष्ट तंत्रों के हौसले कितने बुलंद हैं।

Prabandh Sampadak chandrashekhar Singh

Prabhand Sampadak Of Upbhokta ki Aawaj.

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