BHU प्रशासन की मनमानी से भड़के श्रद्धालु और मॉर्निंग वाकर्स, सुरक्षाकर्मियों पर बदसलूकी का आरोप

वाराणसी 07 जून:काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के द्वारों पर रविवार सुबह उस समय भारी अफरातफरी और आक्रोश की स्थिति पैदा हो गई, जब सुरक्षाकर्मियों ने अचानक बाहरी लोगों के प्रवेश पर रोक लगा दी। इस औचक पाबंदी के कारण बाबा विश्वनाथ के दर्शन के लिए रोज आने वाले श्रद्धालुओं और स्वास्थ्य लाभ के लिए आने वाले मॉर्निंग वाकर्स को गेट के बाहर ही घंटों रुकना पड़ा।
नरिया गेट पर तीखी नोकझोंक
विवाद का मुख्य केंद्र नरिया स्थित डॉक्टर कॉलोनी गेट रहा। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, वहाँ तैनात सुरक्षाकर्मियों ने बिना किसी पूर्व सूचना या ठोस कारण बताए गेट बंद कर दिया। आरोप है कि ड्यूटी पर तैनात सुरक्षाकर्मी न केवल खैनी खाने में मशगूल थे, बल्कि विरोध करने पर श्रद्धालुओं के साथ बेहद रुखा और अमर्यादित व्यवहार भी किया।
“हम वर्षों से बाबा के दर्शन के लिए इसी रास्ते से जाते हैं, लेकिन आज बिना किसी नोटिस के हमें अपराधी की तरह बाहर खड़ा कर दिया गया। सुरक्षाकर्मियों का बात करने का लहजा बेहद शर्मनाक था।”— एक आक्रोशित श्रद्धालु
रोक का कारण: साइकिल रैली या कुप्रबंधन?
जब लोगों ने दूसरे गेट पर तैनात कर्मियों से इस पाबंदी का कारण जानना चाहा, तो बताया गया कि परिसर के भीतर साइकिल रैली का आयोजन किया गया है, जिसकी सुरक्षा के मद्देनजर प्रवेश रोका गया है।
हालांकि, इस तर्क ने आग में घी डालने का काम किया। गेट पर एकत्रित लोगों का कहना था कि:
यदि रैली किसी एक निश्चित मार्ग पर थी, तो पूरे परिसर के गेट बंद करना तर्कसंगत नहीं है।
विश्वविद्यालय प्रशासन को इस तरह की पाबंदी की सूचना कम से कम एक दिन पहले सार्वजनिक करनी चाहिए थी।
साइकिल रैली जैसे आयोजनों के नाम पर आम जनता और श्रद्धालुओं को परेशान करना BHU की तानाशाही कार्यशैली को दर्शाता है।
बढ़ता जन आक्रोश
घंटों गेट के बाहर इंतजार करने के कारण लोगों में विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ भारी नाराजगी देखी गई। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि BHU केवल एक संस्थान नहीं बल्कि आस्था का केंद्र भी है, जहाँ दूर-दराज से लोग दर्शन हेतु आते हैं। ऐसे में सुरक्षाकर्मियों का ‘खैनीबाज’ रवैया और बदतमीजी संस्थान की छवि को धूमिल कर रही है। समाचार लिखे जाने तक इस संबंध में विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी नहीं किया गया था।






