आषाढ़ पूर्णिमा पर सारनाथ में बोले डिप्टी सीएम केशव मौर्य: ‘बुद्ध के शांति व करुणा के संदेश को जन-जन तक पहुंचाना आज की जरूरत’

सारनाथ को यूनेस्को धरोहर में शामिल होना भारत की सांस्कृतिक विरासत का वैश्विक सम्मान
वाराणसी 29जुलाई :उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि वैश्विक अस्थिरता, हिंसा और संघर्ष के वर्तमान दौर में भगवान बुद्ध के विचार ही मानव समाज को शांति, सह-अस्तित्व और सद्भाव का मार्ग दिखा सकते हैं। आषाढ़ पूर्णिमा पर भगवान बुद्ध के शांति, करुणा और अहिंसा के संदेश को जन-जन तक पहुंचाना आज के समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
उपमुख्यमंत्री बुधवार को वाराणसी स्थित सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ हायर तिब्बतन स्टडीज (सारनाथ) के ऑडिटोरियम में आषाढ़ पूर्णिमा दिवस के अवसर पर आयोजित भव्य कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में बोल रहे थे।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत, भगवान बुद्ध की अमर धरोहर को विश्व पटल पर नई ऊर्जा और प्रतिष्ठा प्रदान कर रहा है। आज देश अपनी प्राचीन सांस्कृतिक विरासत को आधुनिक विकास के साथ जोड़कर आगे बढ़ रहा है। अपनी विदेश यात्राओं का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि रूस यात्रा के दौरान उन्होंने भगवान बुद्ध के प्रति वैश्विक आस्था और भारत के लिए अपार सम्मान को खुद महसूस किया है, जो देश की हजारों वर्ष पुरानी आध्यात्मिक शक्ति का प्रमाण है।
बौद्ध सर्किट का तेजी से हो रहा विकास
केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि सम्राट अशोक की तरह ही आज प्रदेश की ‘डबल इंजन सरकार’ बुद्ध के विचारों और उनकी विरासत को आगे बढ़ा रही है। भगवान बुद्ध से जुड़े सभी प्रमुख तीर्थ स्थलों को सड़क, रेल और हवाई मार्ग से मजबूती से जोड़ा जा रहा है, जिससे बौद्ध पर्यटन को नई गति मिली है। सारनाथ को यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल होना पूरी मानवता की साझा विरासत का सम्मान है।
संत रविदास की 650वीं जयंती पर दीं शुभकामनाएं
संबोधन के दौरान उपमुख्यमंत्री ने संत शिरोमणि गुरु रविदास महाराज जी की 650वीं जयंती की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि सामाजिक समरसता और समानता का उनका संदेश आज भी उतना ही प्रासंगिक है। उन्होंने आगे कहा कि काशी, सारनाथ, अयोध्या और मथुरा जैसे पवित्र स्थलों का समग्र विकास न केवल भारत की सांस्कृतिक चेतना को सशक्त कर रहा है, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था और रोजगार के नए अवसर भी पैदा कर रहा है।
कार्यक्रम में ये रहे मौजूद
इस अवसर पर अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध परिसंघ के महासचिव आदरणीय शार्त्से खेंसुर जंगचुप चोएडेन रिम्पोचे, केंद्रीय उच्च तिब्बती अध्ययन संस्थान के कुलपति डॉ. वांगचुक दोरजी नेगी, अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध परिसंघ के महानिदेशक राघव प्रसाद भटनागर, भारत-श्रीलंका अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध संघ के अध्यक्ष आदरणीय डॉ. के. सिरी सुमेधा थेरो सहित देश-विदेश से आए कई पूज्य भिक्षुगण व विशिष्ट अतिथि उपस्थित रहे।






