बीएचयू छात्रों का फूटा गुस्सा: डीयू प्रोफेसर संदीप रागी के खिलाफ लंका थाने में दी गई तहरीर, मुकदमा दर्ज करने की मांग

वाराणसी04नवंबर :काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के छात्रों ने दिल्ली विश्वविद्यालय के राजनीति विज्ञान विभाग के प्रोफेसर व भाजपा प्रवक्ता संदीप रागी द्वारा एक समाचार चैनल की डिबेट के दौरान की गई कथित जातिगत टिप्पणी के खिलाफ कड़ा😭 विरोध दर्ज कराया है। छात्रों ने लंका थाने में लिखित शिकायत देते हुए आरोपी प्रोफेसर के विरुद्ध मुकदमा दर्ज करने की मांग की है।
क्या है पूरा मामला?
छात्रों के अनुसार, एबीपी न्यूज चैनल पर प्रसारित एक डिबेट के दौरान डीयू के प्रोफेसर और भाजपा प्रवक्ता संदीप रागी द्वारा समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता और पिछड़ी जाति से ताल्लुक रखने वाले मनोज काका के खिलाफ कथित तौर पर ‘गंवार’, ‘बेहूदा’ और ‘अहीर’ जैसे अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल किया गया। छात्रों का आरोप है कि एक शिक्षण संस्थान में उच्च पद पर बैठे व्यक्ति द्वारा इस तरह की भाषा का प्रयोग उसकी कुंठित मानसिकता और संकीर्ण सोच को उजागर करता है।
संविधान और कानूनी अधिकारों का हनन: निर्भय यादव
इस दौरान काशी हिंदू विश्वविद्यालय के परास्नातक छात्र निर्भय यादव ने कड़ा ऐतराज जताते हुए बताया कि उक्त वक्तव्य से नागरिकों के मौलिक एवं संवैधानिक अधिकारों का सीधा हनन हुआ है:
अनुच्छेद 14, 15 एवं 21: इसके अंतर्गत नागरिकों को समानता, भेदभाव से संरक्षण और गरिमापूर्ण जीवन जीने का मौलिक अधिकार प्राप्त है।
सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश: माननीय उच्चतम न्यायालय के के.एस. पुट्टास्वामी एवं फ्रांसिस कोराली मामलों के अनुसार, किसी भी व्यक्ति या समाज की सामाजिक प्रतिष्ठा पर हमला करना सीधे तौर पर ‘गरिमापूर्ण जीवन के अधिकार’ का उल्लंघन है।
अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की सीमाएं: संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) के तहत प्राप्त वाक् स्वतंत्रता असीमित नहीं है, और अनुच्छेद 19(2) के अंतर्गत घृणास्पद भाषण (हेट स्पीच) पर पूर्ण प्रतिबंध है।
समाज में वैमनस्यता फैलाने का आरोप
- यादव समाज उत्तर प्रदेश में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) श्रेणी के अंतर्गत आता है। वाराणसी और काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) में इस वर्ग के हजारों विद्यार्थी उच्च शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। छात्रों ने रोष व्यक्त करते हुए कहा कि राष्ट्रीय मंच पर सरेआम पूरे समाज को “गंवार” और “बेहूदा” कहना न केवल समाज की गरिमा व प्रतिष्ठा को धूमिल करता है, बल्कि समाज में जातिगत घृणा और वैमनस्यता की आग भड़काता है।
- छात्रों ने चेतावनी दी है कि यदि ऐसे गैर-जिम्मेदाराना और अशोभनीय आचरण करने वाले प्रोफेसर के खिलाफ सख्त विधिक कार्रवाई नहीं की गई, तो वे लोकतांत्रिक तरीके से अपना आंदोलन और तेज करने के लिए बाध्य होंगे।






