हाईकोर्ट के चाबुक के बाद पावर कॉरपोरेशन पस्त: बिंदकी के चर्चित XEN राजेश कुमार का निलंबन स्वतः समाप्त, बस्ती से किए गए संबद्ध

वाराणसी 04अक्टूबर :फतेहपुर जिले के बिंदकी डिवीजन में तैनात रहे अधिशासी अभियंता इं० राजेश कुमार के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट की सख्ती के बाद पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड को पीछे हटना पड़ा है। हाईकोर्ट द्वारा तय की गई समय-सीमा बीतते ही XEN का निलंबन स्वतः समाप्त हो गया है।
हालांकि, विभाग ने बहाली के तुरंत बाद उन्हें बिंदकी से हटाकर मुख्य अभियंता कार्यालय, बस्ती क्षेत्र से संबद्ध कर दिया है।
क्या है पूरा मामला?
17 फरवरी 2026 को प्रयागराज क्षेत्र-द्वितीय के पत्र और आरोपों के आधार पर PuVVNL मुख्यालय ने इं० राजेश कुमार को निलंबित कर दिया था और आजमगढ़ क्षेत्र से संबद्ध किया था। उन पर बिंदकी (फतेहपुर) में तैनाती के दौरान पद के दुरुपयोग और आचरण नियमावली के उल्लंघन के गंभीर आरोप थे।
हाईकोर्ट में कैसे पलटी बाजी?
निलंबन आदेश के खिलाफ इं० राजेश कुमार ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के समक्ष रिट याचिका (WRIT-A No.-13361 of 2026) दाखिल की थी।
31 अगस्त 2026: हाईकोर्ट ने आदेश दिया कि आरोप-पत्र का उत्तर मिलने के 2 महीने के भीतर विभागीय जांच पूरी कर ली जाए। अगर जांच पूरी नहीं होती है, तो निलंबन आदेश स्वतः समाप्त हो जाएगा।
29 सितंबर 2026: खंडपीठ ने विशेष अपील (SPLA No. 1113 of 2026) में इस आदेश पर मुहर लगा दी।
इं० राजेश कुमार ने 2 सितंबर 2026 को अपना जवाब जांच समिति के समक्ष प्रस्तुत कर दिया था, जिसके बाद अदालत द्वारा निर्धारित 2 महीने की समयसीमा 2 नवंबर 2026 को पूरी हो गई।
PuVVNL प्रबंध निदेशक ने जारी किया बहाली और ट्रांसफर आदेश
हाईकोर्ट के बाध्यकारी आदेश के तहत PuVVNL के प्रबंध निदेशक (संदीप कुमार) ने 3 नवंबर 2026 को दो अलग-अलग आदेश (संख्या 632 और 633) जारी किए हैं:
बहाली : 2 नवंबर 2026 से उनका निलंबन आदेश स्वतः निष्प्रभावी घोषित कर दिया गया और उन्हें विद्युत वितरण खंड-बिंदकी, फतेहपुर में निलंबन से बहाल मानते हुए तैनात किया गया।
बस्ती क्षेत्र ट्रांसफर: विभागीय जांच को पूरी तरह निष्पक्ष रखने के उद्देश्य से उन्हें बिंदकी से हटाकर तत्काल प्रभाव से मुख्य अभियंता (वितरण), बस्ती क्षेत्र, बस्ती के कार्यालय से संबद्ध कर दिया गया है।
वेतन और भत्तों पर फैसला बाद में
विभाग ने स्पष्ट किया है कि निलंबन अवधि (17 फरवरी 2026 से 1 नवंबर 2026 तक) के अवशेष वेतन और भत्तों के भुगतान के संबंध में निर्णय उनके विरुद्ध प्रचलित विभागीय अनुशासनिक जांच के अंतिम निष्कर्ष के आधार पर अलग से लिया जाएगा।
पूर्वान्चल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड के प्रबंध तंत्र के फैसलों के खिलाफ अब कार्मिकों और अधिकारियों में न्यायालय का दरवाजा खटखटाने की प्रवृत्ति में बेतहाशा बढ़ोतरी हुई है।
इं० राजेश कुमार के इस चर्चित मामले ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि विभागीय तानाशाही और मनमाने आदेशों के आगे झुकने के बजाय कानूनी व तथ्यात्मक लड़ाई लड़ने से न्याय मिलना तय है, जिससे प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मचा हुआ है।






