पूर्वांचल

पारंपरिक विधि-विधान और राममय माहौल में ‘द्वितीय गणेश पूजन’ संपन्न, रामचरितमानस पाठ से भक्तिमय हुआ वातावरण

वाराणसी14सितंबर :विश्वप्रसिद्ध रामनगर की रामलीला के अंतर्गत भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास के बीच ‘द्वितीय गणेश पूजन’ का अनुष्ठान श्रद्धा और विधि-विधान के साथ संपन्न हुआ। इस अवसर पर दो घंटे तक चला पूजन और भजन सत्र उपस्थित श्रद्धालुओं के लिए राममय माहौल के साथ जीवन के नैतिक व आध्यात्मिक मूल्यों को समृद्ध करने वाला साबित हुआ।

पूजन अनुष्ठान की शुरुआत प्रतिवर्ष की भांति रामलीला अधिकारी पाठक जी द्वारा यजमान रूप में पंडित श्री रामनारायण पांडेय जी से संकल्प ग्रहण कर की गई। पंडित रामनारायण पांडेय और शांत नारायण पांडेय ने सर्व-कल्याण (राजा, प्रजा, दर्शक, श्रोता एवं कार्यकर्ताओं) की कामना के साथ वैदिक रीति-रिवाज से पूजन संपन्न कराया।

पंच स्वरूपों और व्यास जी की उपस्थिति रही खास

पूजन स्थल पर मुख्य रूप से प्रभु श्री राम, माता सीता, भरत, लक्ष्मण व शत्रुघ्न (पंच स्वरूप) के साथ महर्षि वशिष्ठ, महाराज दशरथ, रामलीला व्यास, रामायणी दल एवं अन्य सहायक पात्रों की गरिमामयी उपस्थिति रही।

‘गाइए गणपति जग वंदन’ की गूंज से भक्तिरस में डूबे श्रद्धालु

पूजन के दौरान जैसे ही रामायणी दल ने नारद वाणी में गोस्वामी तुलसीदास रचित विनयपत्रिका के प्रसिद्ध पद “गाइए गणपति जग वंदन, शंकर सुवन भवानी के नंदन” का सस्वर गायन शुरू किया, पूरा वातावरण भक्ति रस और असीम शांति से सराबोर हो गया। मंगलाचरण की अंतिम पंक्तियों “मागत तुलसीदास कर जोरे। बसहि राम-सिय मानस मोरे॥” के साथ श्रद्धालुओं ने गणपति महाराज से सभी के हृदयों में श्री राम-जानकी के स्थायी निवास की प्रार्थना की।

सात दोहों के पाठ से भावविभोर हुए भक्त

गणेश पूजन के उपरांत रामायणी दल द्वारा श्री रामचरितमानस के बालकांड के मंगलाचरण से लेकर शुरुआती सात दोहों का नारद वाणी में मधुर पाठ किया गया, जिसे सुनकर वहां मौजूद सभी लीला प्रेमी भावविभोर हो उठे। बालकों में भी ईश्वर के प्रति ललक और मानस पाठ को सुनने-गाने का उत्साह साफ देखा गया।

पूजन के समापन के बाद सभी लीला प्रेमी प्रभु की लीला के आगामी प्रसंगों की प्रतीक्षा का आनंद और मन में राम-नाम का सुकून समेटे हुए पुनः अपनी दिनचर्या में लौट गए। कार्यक्रम का समापन ‘हर हर महादेव’ के जयघोष के साथ हुआ।

Prabandh Sampadak chandrashekhar Singh

Prabhand Sampadak Of Upbhokta ki Aawaj.

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