विद्युत विभाग : बलिया हादसे में JE पर गिरी गाज, लेकिन असली गुनहगार कौन? लाइन शिफ्टिंग के सिस्टम में ‘बलि का बकरा’ बनाने का उठा सवाल

बलिया 04नवंबर :यूपी के बलिया गड़वार क्षेत्र स्थित प्राथमिक विद्यालय नवीन पोखरा (कनैला) में मिड-डे मील के लिए सब्जी तोड़ने छत पर गए 12 वर्षीय छात्र अरशद अहमद की 11,000 वोल्ट की हाईटेंशन लाइन से चिपककर हुई दर्दनाक मौत के मामले में बड़ी विभागीय कार्रवाई सामने आई है। पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड ने गड़वार व फेफना उपकेंद्र के अवर अभियंता रामनारायण यादव को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।
लेकिन इस कार्रवाई के बाद प्रशासनिक हलकों और जनसामान्य में यह बड़ा सवाल गूंज रहा है—क्या 11 केवी लाइन शिफ्टिंग की लंबी और जटिल प्रक्रिया में केवल एक जूनियर इंजीनियर ही जिम्मेदार है, या बड़े प्रशासनिक अधिकारियों की उदासीनता पर पर्दा डालने के लिए ‘बलि का बकरा’ बनाया गया है?
अवर अभियंता के निलंबन का आधिकारिक आदेश
कार्यालय मुख्य अभियंता (वितरण), आजमगढ़ क्षेत्र द्वारा जारी आदेश (पत्रांक: 5661 / दिनांक: 03.11.2026) के अनुसार:
घटनास्थल के निरीक्षण में विद्यालय बाउंड्री से 11 केवी लाइन की क्षैतिज दूरी और ग्राउंड क्लीयरेंस मानकों के अनुरूप नहीं पाई गई।
विद्यालय जैसे संवेदनशील स्थल के समीप स्थित खतरनाक लाइनों का नियमित निरीक्षण न करने, समय से लाइन शिफ्टिंग का प्रस्ताव उच्चाधिकारियों को न भेजने और नियमित अनुरक्षण न कराने के आरोप में अवर अभियंता रामनारायण यादव (सैप आई०डी०-11002766) को प्रथम दृष्टया दोषी मानते हुए निलंबित किया गया है।
सवालों के घेरे में विभागीय व्यवस्था: JE के निलंबन से उठे 3 बड़े सवाल
1. क्या अकेले JE के पास होता है लाइन शिफ्टिंग का अधिकार?
बिजली विभाग के नियमों के अनुसार, किसी भी 11 केवी हाईटेंशन लाइन की शिफ्टिंग या बड़े तकनीकी बदलाव के लिए केवल JE की रिपोर्ट काफी नहीं होती। JE का काम निरीक्षण कर प्रस्ताव आगे बढ़ाना है, लेकिन:
प्रस्ताव को तकनीकी व वित्तीय स्वीकृति देना अधिशासी अभियंता और अधीक्षण अभियंता के अधिकार क्षेत्र में आता है।
बजट आवंटन और नीतिगत फैसले मुख्य अभियंता और पूर्वांचल प्रबंधन स्तर से तय होते हैं।
ऐसे में केवल सबसे निचले पायदान के अभियंता पर कार्रवाई कर शीर्ष अधिकारियों को बचा लेना न्यायसंगत है या महज कागजी खानापूर्ति?
2. जब पहले से दी जा चुकी थीं शिकायतें, तो SE और CE क्यों रहे मौन?
स्थानीय ग्रामीणों और विद्यालय प्रशासन का दावा है कि स्कूल भवन और मुख्य द्वार के ऊपर से गुजर रही इस जानलेवा 11,000 वोल्ट की लाइन को हटाने के लिए पूर्व में भी कई बार विभागीय अधिकारियों को सूचित किया गया था। यदि मामला पहले से संज्ञान में था, तो अधीक्षण अभियंता और मुख्य अभियंता स्तर से इस संवेदनशील प्रकरण पर त्वरित बजट जारी कर line shifting क्यों नहीं कराई गई?
3. ‘रेड टेपिज़्म’ और लालफीताशाही की बलि चढ़ा मासूम
विभागीय सुस्ती और फाइलों की लालफीताशाही के कारण अक्सर ऐसी अति-संवेदनशील फाइलें महीनों और सालों तक दफ्तरों के चक्कर काटती रहती हैं।
जब हादसा हो जाता है, तो उच्चाधिकारी अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ते हुए तत्काल प्रभाव से JE का निलंबन आदेश जारी कर जनता के गुस्से को शांत करने का प्रयास करते हैं।
मिशन मोड’ में जवाबदेही केवल नीचे नहीं, ऊपर भी तय हो
बलिया की इस दुखद घटना ने साबित कर दिया है कि जब तक पूरे पूर्वांचल जोन के स्कूलों के ऊपर से गुजर रही एचटी/एलटी लाइनों को हटाने के लिए ‘मिशन मोड’ पर काम नहीं होगा, तब तक ऐसी त्रासदियों को रोका नहीं जा सकता।
स्थानीय जनता और जागरूक नागरिकों की मांग है कि:
इस हादसे की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराई जाए।
line shifting के प्रस्तावों को लंबित रखने वाले अधिशासी अभियंता, अधीक्षण अभियंता और मुख्य अभियंता स्तर के अधिकारियों की भूमिका की भी जांच कर उनकी सख्त जवाबदेही तय की जाएI
केवल निचले कर्मचारियों पर गाज गिराकर मामले को रफा-दफा करने की परिपाटी बंद होनी चाहिए।






