काशी में गूंजीं मुंशी प्रेमचंद की कालजयी कृतियां: लमही महोत्सव 2026 में देश भर के साहित्यकार हुए सम्मानित

वाराणसी31 जुलाई :उपन्यासों के सम्राट और हिंदी-उर्दू साहित्य के युगपुरुष मुंशी प्रेमचंद की 146वीं जयंती पर उनकी जन्मस्थली लमही में तीन दिवसीय ‘लमही महोत्सव 2026’ का भव्य शुभारंभ हुआ। इस अवसर पर प्रेमचंद के विचारों, सामाजिक सरोकारों और उनकी कालजयी रचनाओं को याद करते हुए देश-विदेश से आए वरिष्ठ एवं युवा साहित्यकारों को विशेष रूप से सम्मानित किया गया।
महोत्सव का उद्घाटन दीप प्रज्वलन और प्रेमचंद की प्रतिमा पर माल्यार्पण के साथ हुआ। पूरे लमही गांव में सांस्कृतिक कार्यक्रमों और साहित्यिक गोष्ठियों की बहार रही।
साहित्यिक गोष्ठी और विचार-मंथन
समारोह के मुख्य सत्र ‘आज के दौर में प्रेमचंद की प्रासंगिकता’ में वक्ताओं ने कहा कि प्रेमचंद की कहानियां केवल बीते दौर की तस्वीर नहीं, बल्कि वर्तमान समाज का आईना भी हैं। कृषक समाज की समस्याएं, महिलाओं का संघर्ष और सामाजिक असमानता जैसे विषयों पर उनका लेखन आज भी उतना ही प्रासंगिक है जितना एक सदी पहले था।
प्रमुख साहित्यकार हुए सम्मानित
संस्कृति विभाग और प्रांतीय साहित्य अकादमी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में साहित्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले 10 प्रमुख साहित्यकारों को ‘प्रेमचंद साहित्य सम्मान 2026’ से नवाजा गया। सम्मान स्वरूप उन्हें अंगवस्त्रम्, प्रशस्ति पत्र और स्मृति चिह्न प्रदान किया गया।
रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियां
महोत्सव में स्थानीय कलाकारों और रंगकर्मियों ने प्रेमचंद की प्रसिद्ध कहानियों—‘गोदान’, ‘बड़े घर की बेटी’, और ‘ईदगाह’ का भावपूर्ण नाट्य रूपांतरण प्रस्तुत किया, जिसे दर्शकों ने खूब सराहा। स्कूली बच्चों के बीच निबंध और कहानी-वाचन प्रतियोगिताएं भी आयोजित की गईं।
समारोह के समापन पर प्रेमचंद के स्मारक स्थल पर दीपोत्सव का आयोजन किया गया, जिससे पूरा लमही गांव दीपों की रोशनी से जगमगा उठा।






