विद्युत विभाग : बलिया में मासूम की मौत के बाद उठे सवाल, पूर्वांचल प्रबंधन को मिशन मोड पर करानी होगी स्कूलों से लाइन शिफ्टिंग

बलिया (उत्तर प्रदेश)03अक्टूबर : बलिया के गड़वार क्षेत्र स्थित प्राथमिक विद्यालय नवीन पोखरा में घटी दर्दनाक घटना ने एक बार फिर बिजली विभाग और स्कूल प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विद्यालय परिसर में मिड-डे मील के लिए सब्जी (लौकी) तोड़ने छत पर भेजे गए 12 वर्षीय छात्र अरशद अहमद की 11 हजार वोल्ट की हाईटेंशन लाइन की चपेट में आने से मौत हो गई। लगभग 5 घंटे तक मासूम का शव तार से चिपका रहा, जिसने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है।
शिक्षकों और बिजली विभाग की घोर लापरवाही
ग्रामीणों और परिजनों का आरोप है कि शिक्षकों द्वारा बच्चे को किचन की छत पर जबरन भेजा गया था। विद्यालय की छत और मुख्य द्वार से महज कुछ दूरी पर 11 हजार वोल्ट की हाईटेंशन लाइन गुजर रही थी, जिसे हटाने के लिए पूर्व में कई बार मांग की जा चुकी थी।
घटना के बाद पुलिस ने दो शिक्षकों, एक शिक्षा मित्र और फेफना विद्युत उपकेंद्र के अवर अभियंता के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। वहीं, बेसिक शिक्षा अधिकारी द्वारा दो शिक्षकों को निलंबित करते हुए जांच के आदेश जारी किए गए हैं।
आखिर इन मौतों का जिम्मेदार कौन?
यह कोई पहली घटना नहीं है जब किसी सरकारी या निजी स्कूल के ऊपर से गुजर रहे हाईटेंशन तारों ने मासूम की जान ली हो। पूर्व में भी प्रदेश के विभिन्न जिलों में इस प्रकार के हादसे देखने को मिले हैं। हर बार हादसे के बाद जांच कमेटियां बनती हैं, आश्वासन दिए जाते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति जस की तस बनी रहती है।
क्या मासूमों की सुरक्षा से समझौता केवल कागजी निर्देशों तक ही सीमित रहेगा?
पूर्वांचल प्रबंधन को मिशन मोड पर उठाना होगा कदम
पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड के शीर्ष प्रबंधन और शासन को इस विषय पर कड़ा संज्ञान लेते हुए पूरे जोन में अभियान चलाना होगा। जितने भी प्राथमिक, उच्च प्राथमिक व निजी विद्यालय हैं, जिनके ऊपर से या अत्यंत समीप से हाईटेंशन/लो-टेंशन लाइनें गुजर रही हैं, उनकी लाइन शिफ्टिंग का काम ‘मिशन मोड’ में प्राथमिकता के आधार पर कराया जाना अनिवार्य है। जब तक विभागों के बीच समन्वय और जवाबदेही तय नहीं होगी, तब तक ऐसे हादसों को रोक पाना संभव नहीं होगा।
स्थानीय प्रबंधन और अभियंताओं के लचर रवैये पर बड़ा सवाल
ऐसी घटनाएं सीधे तौर पर स्थानीय स्तर पर विद्युत प्रबंधन और प्रशासनिक व्यवस्था पर गहरा सवालिया निशान खड़ा करती हैं। विद्यालय के ऊपर से गुजर रहे खतरनाक हाईटेंशन तारों को हटाने के लिए पहले भी मांग की गई थी, लेकिन स्थानीय स्तर पर अधीक्षण अभियंता और मुख्य अभियंता (Chief Engineer) के लचर, उदासीन और लापरवाह रवैये के चलते कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। इस तरह की घोर लापरवाही का खामियाजा आगे से किसी और मासूम को अपनी जान देकर न भुगतना पड़े, इसके लिए अब कड़े और कठोर निर्देश जारी करके जिम्मेदारी सुनिश्चित करनी ही होगी।






