स्थानांतरण आदेश का खुला मज़ाक? 2 साल से जमे हैं कार्यकारी सहायक, विदाई पार्टियां दूसरों की खाते हैं और खुद कुर्सी से चिपके हैं!

गाजीपुर /सैदपुर 26 जुलाई : पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड में अधिकारियों के आदेशों की किस कदर धज्जियां उड़ाई जाती हैं, इसका जीता-जागता उदाहरण विद्युत वितरण खंड, सैदपुर में देखने को मिल रहा है।
यहाँ तैनात कार्यकारी सहायक सलाउद्दीन शाह का स्थानांतरण 30 जून 2024 को ही प्रयागराज जोन-2 के लिए हो चुका है। लेकिन हैरत की बात यह है कि लगभग दो साल का लंबा वक्त बीत जाने के बाद भी महाशय ने सैदपुर खंड की मोह-माया नहीं छोड़ी है और अभी तक कार्यमुक्त (Relieve) नहीं हुए हैं।
लेन-देन का खेल या व्यवस्था पर पकड़?
विभाग के गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म है कि आखिर कौन सी ऐसी “जादुई ताकत” या “आर्थिक लेन-देन” का समीकरण है, जिसके दम पर स्थानांतरण आदेश ठंडे बस्ते में पड़ा हुआ है। प्रबंध निदेशक कार्यालय से लेकर मुख्य अभियंता स्तर तक के कड़े निर्देशों को दरकिनार कर कुर्सी पर जमे रहना, विभागीय सांठगांठ और गंभीर भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है।
“दूसरों को विदाई, खुद कुर्सी से सगाई!”
खंड में एक ओर जहाँ अन्य कर्मचारियों का तबादला होने पर यह महाशय खुद मुख्य अतिथि की तरह खड़े होकर उन्हें माला पहनाते हैं और विदाई पार्टियों में बढ़-चढ़कर शामिल होते हैं, वहीं जब खुद के कार्यमुक्त होने की बात आती है, तो मानों कुर्सी से फेवीकोल का जोड़ लग जाता है।
MD कार्यालय का कड़ा पत्र भी बेअसर (पत्रांक: 671 / दिनांक: 10/06/2026)
प्रबंध निदेशक कार्यालय से अधीक्षण अभियंताओं और मुख्य अभियंताओं को जारी पत्रांक 671 (दिनांक 10.06.2026) में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि वर्ष 2024 से अद्यतन तिथि तक स्थानांतरित कर्मचारियों को कार्यमुक्त न करना प्रबंध निदेशक के आदेशों की घोर अवहेलना है। इसमें साफ निर्देश दिया गया है कि ऐसे कर्मचारियों को तत्काल कार्यमुक्त किया जाए और लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
इसके बाद पत्रांक 376 (दिनांक 12.06.2026) के जरिए तत्काल आख्या मांगी गई थी, लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या उच्च अधिकारियों के इन आदेशों का असर सैदपुर खंड में जमे ऐसे ‘अमर’ कर्मचारियों पर पड़ेगा?
बड़ा सवाल:
आखिर किसके संरक्षण में स्थानांतरण के बाद भी कार्यमुक्त नहीं किया जा रहा है?
क्या उच्च प्रबंधन ऐसे कर्मचारियों और उन्हें शह देने वाले अधिकारियों पर सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई करेगा या आदेश सिर्फ कागजों तक ही सीमित रहेंगे?






