पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम में विजिलेंस की सुस्ती पर उठे सवाल: 21 जिलों में 24 टीमें तैनात, पर सिर्फ 9 जिलों में पकड़ी गई बिजली चोरी

क्या बाकी 12 जिले पूरी तरह ‘बिजली चोरी मुक्त’ हैं या विजिलेंस टीमों की साठगांठ व लापरवाही?
वाराणसी/गोरखपुर 11सितंबर : पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (PuVVNL) के अंतर्गत आने वाले 21 जनपदों में बिजली चोरी रोकने और राजस्व नुकसान को थामने के लिए कुल 24 विजिलेंस (प्रवर्तन) टीमों का गठन किया गया है। लेकिन हालिया अभियानों और सरकारी आंकड़ों के विश्लेषण से एक चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई है। निगम द्वारा जारी 5 किलोवाट एवं उससे अधिक की भारी बिजली चोरी की नवीनतम सूची में विजिलेंस की कार्यशैली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं।
निगम के आंकड़ों के मुताबिक, 24 प्रवर्तन टीमों की मौजूदगी के बावजूद मात्र 9 जनपदों में ही भारी बिजली चोरी के मामले उजागर किए जा सके हैं। बाकी के 12 जिलों में विजिलेंस टीमों के हाथ पूरी तरह खाली रहे हैं। ऐसे में अब बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या ये 12 जनपद वाकई में ‘बिजली चोरी मुक्त’ हो चुके हैं, या फिर स्थानीय विजिलेंस टीमें और बिजली विभाग के अधिकारी निष्पक्ष कार्रवाई करने के बजाय आंखें मूंदे बैठे हैं?
केवल 9 जिलों में हुई बड़ी कार्रवाई
जारी की गई रिपोर्ट के अनुसार, जिन 9 जनपदों में 5 किलोवाट या उससे अधिक की चोरी पकड़कर धारा 135 के तहत प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई है, उनमें निम्नलिखित मामले शामिल हैं:
सोनभद्र: 6 किलोवाट की चोरी (मीटर बाईपास)।
वाराणसी द्वितीय: 8 किलोवाट की भारी बिजली चोरी (मीटर बाईपास)।
मिर्जापुर: 5 किलोवाट की चोरी (मीटर बाईपास)।
कुशीनगर: 6 किलोवाट की बिजली चोरी (मीटर बाईपास)।
वाराणसी प्रथम: 6 किलोवाट की चोरी (मीटर शंट व न्यूट्रल कट)।
भदोही: 5 किलोवाट की चोरी (मीटर बाईपास)।
बलिया: 6 किलोवाट की चोरी (मीटर बाईपास)।
गोरखपुर द्वितीय: 7 किलोवाट की चोरी (कटिया/डायरेक्ट केबल द्वारा)।
देवरिया: 6 किलोवाट की बिजली चोरी (मीटर बाईपास)।
इन 9 मामलों में विजिलेंस अधिकारियों एवं स्थानीय पुलिस की संयुक्त टीमों द्वारा परिसरों का औचक निरीक्षण कर विद्युत अधिनियम की धारा 135 के तहत मुकदमे दर्ज कराए गए।
12 जिलों में ‘सन्नाटा’ — उठ रहे गंभीर सवाल
दूसरी तरफ, पूर्वांचल निगम के शेष 12 जनपदों में विजिलेंस टीमों द्वारा 5 किलोवाट से अधिक की एक भी बड़ी चोरी न पकड़ा जाना विभागीय गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है।
बिजली मामलों के विशेषज्ञों और जागरूक नागरिकों का मानना है कि पूर्वांचल के कई औद्योगिक और सघन आबादी वाले क्षेत्रों में कटियामारी और मीटर से छेड़छाड़ कर व्यावसायिक व घरेलू स्तर पर भारी बिजली चोरी का खेल धड़ल्ले से जारी है। इसके बावजूद 12 जिलों से एक भी मामला सामने न आना सीधे तौर पर विजिलेंस टीमों की ढिलाई, लचर कार्यप्रणाली या स्थानीय स्तर पर सांठगांठ की ओर इशारा करता है।
उच्चाधिकारियों की चुप्पी और विभागीय कार्यशैली पर उठे प्रश्न
यदि इन जनपदों में बिजली चोरी नहीं हो रही है, तो निगम को इसका आधिकारिक दावा करना चाहिए। परंतु यदि चोरी जारी है और विजिलेंस टीमें कार्रवाई नहीं कर रही हैं, तो इन जिम्मेदार प्रवर्तन प्रभारियों व निरीक्षकों के खिलाफ विभागीय जांच क्यों नहीं बैठाई जा रही?
उपभोक्ताओं और सामाजिक संगठनों की मांग है कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम के उच्च प्रबंधन (MD व निदेशक) को उन जनपदों की विजिलेंस टीमों की समीक्षा करनी चाहिए जहां कोई कार्रवाई नहीं दिखाई दे रही है। साथ ही, बाहरी या विशेष विजिलेंस दस्तों से औचक छापेमारी करवाकर स्थिति की जमीनी हकीकत का पता लगाया जाना चाहिए ताकि राजस्व की हो रही चपत को रोका जा सके।






