एक झलक

गोरखपुर 07नवंबर :उत्तर प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड में करोड़ों रुपये के गबन और सेवानिवृत्ति से ठीक एक दिन पहले हुई बर्खास्तगी के चर्चित प्रकरण में इलाहाबाद उच्च न्यायालय की डिविजन बेंच से नया और बड़ा मोड़ आ गया है। 1.69 करोड़ रुपये से अधिक के ऑनलाइन बिलिंग गबन मामले में बर्खास्त किए गए पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम के सहायक लेखाधिकारी ईशपाल सिंह की विशेष अपील (Special Appeal No. 705 of 2026) को माननीय उच्च न्यायालय ने विस्तृत सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया है। वहीं, अदालत की सख्ती के बाद अब बिजली विभाग ने अपना जवाबी हलफनामा दाखिल करने के लिए कोर्ट से समय की मांग की है।

क्या था पूरा मामला:

रिटायरमेंट से एक दिन पहले गिरी थी गाज
जिला उप-मुख्य लेखाधिकारी कार्यालय क्षेत्र-प्रथम (वाराणसी/गोरखपुर) से संबद्ध रहे सहायक लेखाधिकारी ईशपाल सिंह 31 दिसंबर 2025 को सेवानिवृत्त होने वाले थे। लेकिन सेवानिवृत्ति से ठीक एक दिन पहले, 30 दिसंबर को पावर कॉर्पोरेशन के निदेशक (कार्मिक प्रबंधन एवं प्रशासन) डॉ. जान मथाई ने उन्हें सेवा से बर्खास्त कर दिया।

गबन का आरोप:

ईशपाल सिंह जब फरवरी 2016 से मई 2018 तक विद्युत वितरण खंड, बागपत में सहायक लेखाधिकारी (राजस्व) के पद पर तैनात थे, तब उन पर ऑनलाइन बिलिंग सिस्टम (HCL और M-Power/Fluentgrid) के माध्यम से प्राप्त ₹1,69,52,473 (1.69 करोड़ से अधिक) रुपये के गबन का आरोप लगा था।

सांठगांठ: आरोप था कि उन्होंने बिलिंग क्लर्क और रोकड़िए (सुरेश बाबू) के साथ मिलकर इस राशि का घपला किया और 25 रसीद बुक भी वापस जमा नहीं कीं।

पहला निलंबन व कार्रवाई: जांच के दौरान निलंबित कर उन्हें मुख्यालय स्थानांतरित किया गया। जांच रिपोर्ट के आधार पर कॉर्पोरेशन ने 7 जून 2023 को पहली बार उन्हें बर्खास्त कर दिया था।

हाईकोर्ट का पहला आदेश और पुनः जांच की लीपापोती

7 जून 2023 की बर्खास्तगी के खिलाफ ईशपाल सिंह ने हाईकोर्ट की शरण ली थी।

10 जनवरी 2024 का फैसला:

इलाहाबाद हाईकोर्ट की सिंगल जज बेंच ने विभागीय जांच की प्रक्रियागत खामियों को देखते हुए बर्खास्तगी रद्द कर दी थी। कोर्ट ने उन्हें नौकरी में बहाल करते हुए केवल निलंबित रखने और पुनः नियमानुसार जांच कराने का आदेश दिया था।

मुख्य अभियंता की रिपोर्ट: इसके बाद जांच मुख्य अभियंता आशुतोष श्रीवास्तव को सौंपी गई। मुख्य अभियंता की जांच में भी आरोप सिद्ध पाए गए, जिसके आधार पर 30 दिसंबर को उन्हें दोबारा बर्खास्त करते हुए ₹11,06,457 (11 लाख रुपये से अधिक) की वसूली/जुर्माने का आदेश सुनाया गया।

सिंगल जज के फैसले को चुनौती: डिविजन बेंच में क्यों बैकफुट पर आया विभाग?

पुनः बर्खास्तगी के बाद जब ईशपाल सिंह ने दोबारा याचिका दाखिल की, तो एकल पीठ ने इसे वैकल्पिक कानूनी उपाय की उपलब्धता का हवाला देकर खारिज कर दिया था। इसके खिलाफ ईशपाल सिंह के वकीलों (मणि शंकर पांडेय, प्रणेश कुमार मिश्रा व रामा नंद शुक्ला) ने डिविजन बेंच के समक्ष विशेष अपील (Special Appeal No. 705 of 2026) दायर की।

डिविजन बेंच के सामने रखी गईं मुख्य दलीलें:

विभागीय जांच समिति ने बिना कोई प्रत्यक्ष साक्ष्य और बिना गवाहों को पेश किए, केवल कागजी औपचारिकताओं के आधार पर मनमाने ढंग से दोष सिद्ध कर दिया।

यह प्रक्रिया प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों और मौलिक अधिकारों का घोर उल्लंघन है।

उच्च न्यायालय की कड़ी टिप्पणी और विभागीय चुप्पी

माननीय न्यायमूर्ति जे. जे. मुनीर और न्यायमूर्ति अरुण कुमार की खंडपीठ ने अपीलार्थी की दलीलों में दम पाते हुए माना कि जहाँ प्राकृतिक न्याय का हनन हुआ हो, वहाँ याचिकाकर्ता को वैकल्पिक उपाय के नाम पर नहीं भटकाया जा सकता। अदालत ने इस अपील को सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया।

इसके साथ ही अदालत ने UPPCL के चेयरमैन, पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम (वाराणसी) के प्रबंध निदेशक सहित शीर्ष अधिकारियों को आदेश की प्रति 48 घंटे के भीतर भेजने का निर्देश दिया था।

7 अगस्त 2026 की प्रगति: विभाग ने मांगा हलफनामे का समय

मामला जब न्यायमूर्ति सौमित्र दयाल सिंह और न्यायमूर्ति अरुण कुमार की पीठ के समक्ष आया, तो बिजली विभाग के वकील अभिषेक श्रीवास्तव ने अदालत से जवाबी हलफनामा (Counter Affidavit) दाखिल करने के लिए 4 सप्ताह का अतिरिक्त समय मांगा।

अदालत ने समय देते हुए निर्देश दिया है कि विभाग अपना हलफनामा दाखिल करे, जिसके बाद अपीलार्थी अपना रीज्वाइंडर (Rejoinder) दाखिल करेगा। अदालत ने इस मामले को आगे की सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का आदेश दिया है।

निष्पक्ष न्याय पर टिकीं निगाहें

एक तरफ जहाँ विभाग 1.69 करोड़ के गबन और रसीद बुकों की हेराफेरी को लेकर सख्त कार्रवाई का दावा कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ हाईकोर्ट द्वारा प्रक्रियागत त्रुटियों और साक्ष्यों के अभाव के बिंदु पर अपील स्वीकार कर लेने से पावर कॉर्पोरेशन के अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल उठने लगे हैं। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि विभाग अपनी जांच और कार्रवाई के पक्ष में अदालत के समक्ष क्या साक्ष्य प्रस्तुत करता है।

Prabandh Sampadak chandrashekhar Singh

Prabhand Sampadak Of Upbhokta ki Aawaj.

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